भीलवाड़ा | एक विवाह भोज में जाना हुआ, एंट्री पर भव्य स्वागत द्वार.. आगे कोई सौ-डेढ़ सौ फीट की गैलरी.. इसे पार करने के बाद ही भोजन स्थल पर पहुंचा जा सकता है.. जगमगाती इस गैलरी में मखमली कारपेट, सुनहरे फ्लॉवर पॉट्स और जगह जगह दूल्हा दुल्हन के आपसी तालमेल को दर्शाते विभिन्न मुद्राओं के चित्र उनके प्रेम के प्रमाण पत्र के रूप में प्रदर्शित है.. इन्हें देखने भर से ही स्पष्ट हो जाता है कि इनका भावी जीवन प्रेम से परिपूर्ण होगा। ये फोटो देख मुझे थोड़ी जलन भी हुई क्योंकि मेरी अपनी शादी में जो फोटोग्राफर था वो दरअसल किराना की दुकान चलाता था.. उसे एंगल की समझ नहीं थी सो मुझसे बेहतर उस घोड़े के फोटो आए, जिस पर मैं दूल्हा बनकर बैठा था। फिर भी वो फोटो बेहतर थे। कम से कम रियल तो थे। यहां पता नहीं क्यूं बनावट और दिखावट झलक रही है। बहरहाल, गैलरी में सजे धजे लोग इन बातों पर गौर किए बगैर भोजन स्थल की ओर बढ़ रहे हैं। कुछ अनुभवी लोग तो ऐसी भव्यता से मन ही मन मैन्यू का अंदाजा भी लगा लेते हैं। अंदर यहां खाने से भरी प्लेट थामे लोग कुछ समूह में खड़े हैं, कुछ अकेले तृप्ति में लीन है। उधर, कोने में आर्केस्ट्रा वालों के बीच जबरन घुसा, शादी वालों का कोई रिश्तेदार माइक थामे पल-पल दिल के पास वाला गीत उगल रहा है। मेरे बाजू में भल्ला देव टाइप के विशाल रथ पर दूल्हा दुल्हन सवार होकर वरमाला के लिए आ रहे हैं। दूल्हा-दुल्हन के लिए खासा लम्बा और ऊंचा स्टेज है। एक लड़की, बूढ़ी अम्मा को आहिस्ता आहिस्ता सीढ़ियां चढ़ाते हुए स्टेज पर ले गयी है, जिनको फोटोग्राफर ने कुछ देर रोक दिया है.. अभी फोटोशूट चल रहा है। अम्मा आशीर्वाद देने वालों की पंक्ति में खड़ी है। बुजुर्गों को आशीर्वाद देने भी स्टेज पर जाना पड़ता है। वर-वधू खुद उठकर आए तो मैकअप और फोटो दोनों बिगड़ सकते हैं जो कि शादी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।