हनुमानगढ़ की भादरा कृषि उपज मंडी में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद में हेराफेरी का बड़ा मामला सामने आया है। जांच में फर्जी गिरदावरी के आधार पर गेहूं बेचने का प्रयास उजागर होने के बाद प्रशासन ने जमींदारा कमीशन शॉप नामक फर्म पर 1.11 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है और उसका लाइसेंस 14 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है। विभागीय जांच के बाद यह कार्रवाई की गई। फर्म हरियाणा से अवैध रूप से गेहूं लाकर समर्थन मूल्य पर बेचने का प्रयास कर रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, फर्म पर 1 लाख 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। साथ ही, गेहूं खरीद के पीक सीजन में अनुचित लाभ को रोकने के लिए फर्म का लाइसेंस 23 अप्रैल से 6 मई तक 14 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है। मंडी सचिव सीएल वर्मा ने बताया कि इस मामले को प्रशासक एवं उपखंड अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। सुनवाई के बाद यह निर्णय लिया गया। कृषि विपणन विभाग के उपनिदेशक विष्णुदत्त शर्मा, गोलूवाला मंडी सचिव मनोज कुमार और रसद विभाग के प्रवर्तन अधिकारी बाबूलाल जानू की टीम ने फर्म के रिकॉर्ड की गहनता से जांच की। जांच में सामने आया कि फर्म ने गुलजारी और कपिल नामक किसानों के नाम पर मंडी में गेहूं लाना दर्शाया था। हालांकि, उस समय इन दोनों किसानों के खेतों में फसल खड़ी थी। इसके बावजूद, रिकॉर्ड में गेहूं की आवक दिखाकर समर्थन मूल्य का लाभ लेने की कोशिश की गई। जांच टीम ने मौके पर पड़े गेहूं को ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरवाकर धर्मकांटे पर तौल करवाया। लगभग 20 घंटे तक चली इस जांच में फर्म के पास 2067 क्विंटल गेहूं पाया गया, जबकि रिकॉर्ड में 3146 क्विंटल गेहूं दर्शाया गया था। इस प्रकार, 1078 क्विंटल गेहूं का बड़ा अंतर सामने आया। प्रशासन ने खरीद एजेंसी नाफेड के गुणवत्ता निरीक्षकों को भी सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य समर्थन मूल्य व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना और भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोकना है। गौरतलब है कि राजस्थान में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद पर 150 रुपए बोनस दिया जा रहा है। इसके चलते हरियाणा व राजस्थान के भाव में अंतर है। अधिक मुनाफा कमाने के लिए कुछ व्यापारी हरियाणा से गेहूं लाकर राजस्थान में बेचने का प्रयास कर रहे हैं। खरीद सीजन की शुरुआत में ही हनुमानगढ़ मंडी में भी ऐसी शिकायतें सामने आई थी।