हनुमानगढ़ जिले में समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीद से पहले नियमों में लगातार बदलाव हो रहे हैं। इससे खरीद व्यवस्था को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों का मानना है कि इस बार लागू किया गया स्लॉट सिस्टम और बारदाने की भारी कमी खरीद प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इस वर्ष मंडी यार्ड को ब्लॉकों में विभाजित कर लॉटरी के माध्यम से खरीद एजेंसियों का आवंटन किया गया है। हालांकि, जमीनी स्तर पर कई आवश्यक व्यवस्थाएं अभी भी अधूरी हैं। सबसे बड़ी समस्या स्लॉट सिस्टम को लेकर है। इसके तहत किसानों को अपनी उपज एक निर्धारित समय पर ही मंडी लानी होगी, जिससे देरी और भीड़ बढ़ने की आशंका है। बाधित हो सकता है खरीद कार्य बारदाने की कमी एक और प्रमुख चिंता का विषय है। व्यापारियों के अनुसार, वर्तमान में बारदाने की उपलब्धता केवल 12 से 15 प्रतिशत है। यदि समय पर पर्याप्त बारदाना उपलब्ध नहीं कराया गया, तो खरीद कार्य बाधित हो सकता है। इसके अलावा हैंडलिंग और ट्रांसपोर्ट के टेंडर अभी तक पूरे नहीं हुए हैं, और मंडियों में पर्याप्त स्टाफ की कमी है। गेहूं की आवक बढ़ने पर ये कमियां व्यवस्थाओं को चरमरा सकती हैं। हनुमानगढ़ में होती है प्रदेश की सबसे ज्यादा गेहूं खरीद पिछले वर्षों में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा समय पर बारदाना उपलब्ध कराने, उपज के उठाव और परिवहन की बेहतर व्यवस्था के कारण खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती थी। इससे किसानों को भी समय पर भुगतान मिलता था। हनुमानगढ़ जिले में प्रदेश की सबसे ज्यादा गेहूं खरीद होती है। यदि प्रशासन ने इन समस्याओं पर तत्काल ध्यान नहीं दिया, तो बड़े पैमाने पर होने वाली इस खरीद प्रक्रिया में गंभीर बाधा आ सकती है, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। प्रदेश भर में सबसे ज्यादा गेहूं खरीद हनुमानगढ़ जिले से ही होती है। पिछले साल जिले में 46 हजार 718 किसानों से 8.62 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई थी। इसके एवज में 2219 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। इस बार भी हनुमानगढ़ से ही सर्वाधिक खरीद का लक्ष्य है। सरकार 7 लाख 95 हजार 800 मीट्रिक टन गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदेगी। कृषि विभाग के अनुसार जिले में करीब 2 लाख 39 हजार 400 हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई है।