हनुमानगढ़ की नई धान मंडी टाउन में सोमवार को भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के वरिष्ठ अधिकारियों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर हो रही गेहूं खरीद व्यवस्था का निरीक्षण किया। इस दौरान एफसीआई निदेशक लोकेश कुमार शर्मा (दिल्ली), मंडल प्रबंधक श्रीगंगानगर रजनीश कुमार, संघ महाप्रबंधक जयपुर पीसी मीणा और सहायक महाप्रबंधक नीलकमल ने मंडी का दौरा कर जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान फूडग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन टाउन के पदाधिकारियों ने एफसीआई अधिकारियों से मुलाकात कर गेहूं खरीद से संबंधित विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की। इस मौके पर एसोसिएशन के अध्यक्ष रामलाल किरोड़ीवाल और सचिव दिलीप सिंह ढिल्लों सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। व्यापारियों ने एफसीआई निदेशक को एक ज्ञापन सौंपकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि 'क' श्रेणी के कच्चे आढ़तियों को दी जा रही आढ़त राशि निर्धारित 2.25 प्रतिशत से काफी कम है। व्यापारियों ने तुलना करते हुए कहा कि पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा में आढ़तियों को अधिक भुगतान किया जाता है। उन्होंने एफएसडी गोदाम में तौल के दौरान सर्वर की धीमी गति को एक बड़ी समस्या बताया। व्यापारियों के अनुसार, एक ट्रक की तौल में 20 से 30 मिनट लगने के कारण लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे जाम की स्थिति उत्पन्न होती है। इसके अतिरिक्त, आवासीय क्षेत्र से भारी वाहनों के गुजरने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। बायोमेट्रिक सत्यापन में आ रही दिक्कतों पर भी व्यापारियों ने नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि किसानों की उंगलियों और आंखों का सही स्कैन न होने के कारण कई किसान समर्थन मूल्य योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं, जिससे अक्सर विवाद की स्थिति बन जाती है। व्यापारियों ने एफसीआई अधिकारियों से गेहूं खरीद की अंतिम तिथि 31 मई से बढ़ाकर 30 जून करने की मांग की। उन्होंने नए बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और अतिरिक्त वेयरहाउस खोलने का भी आग्रह किया। इस दौरान बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद थे और उन्होंने अपनी समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।