हनुमानगढ़ जिले में भीषण गर्मी और रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ी बिजली की मांग के कारण विद्युत व्यवस्था चरमरा गई है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक उपभोक्ताओं को हर 10 से 15 मिनट में बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। जिले में बिजली की मांग करीब 80 लाख यूनिट प्रतिदिन पहुंचने से ट्रांसफॉर्मर, फीडर और केबलों पर दबाव बढ़ गया है, जिससे लगातार फॉल्ट हो रहे हैं। वहीं, मौसम विभाग ने अगले एक सप्ताह तक आंधी और बारिश की संभावना जताई है, जिससे तापमान और बिजली की मांग दोनों में कमी आने की उम्मीद है। भीषण गर्मी से बढ़ा बिजली का लोड इन दिनों जिले में अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जबकि न्यूनतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के करीब है। तेज गर्मी के चलते एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। बिजली निगम के अधिकारियों के अनुसार, जिले में बिजली की मांग लगभग 80 लाख यूनिट प्रतिदिन तक पहुंच गई है। पुराने नेटवर्क पर बढ़ा दबाव, लगातार हो रहे फॉल्ट लगातार बढ़ते लोड के कारण ट्रांसफॉर्मर, फीडर और केबलों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इसके चलते जगह-जगह फॉल्ट होने से बिजली आपूर्ति बार-बार बाधित हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि पुराने नेटवर्क पर सामान्य से लगभग तीन गुना तक बढ़े लोड के कारण केबल जलने, फ्यूज उड़ने और इंसुलेटर खराब होने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। तकनीकी टीमें लगातार मरम्मत कार्य में जुटी हैं, लेकिन बढ़ती मांग के कारण व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। शहर और गांव दोनों प्रभावित बार-बार बिजली गुल होने से शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के उपभोक्ता परेशान हैं। आमजन, किसान, व्यापारी और उद्योगों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी रात के समय हो रही है, जब लगातार बिजली कटने से लोगों की नींद और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। बारिश से मिल सकती है राहत मौसम विभाग ने अगले एक सप्ताह तक जिले में गरज-चमक, आंधी और बारिश की संभावना जताई है। गुरुवार को अधिकतम तापमान 41 डिग्री और न्यूनतम 31 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इसके बाद तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आने की संभावना है और 7 जुलाई तक अधिकतम तापमान करीब 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। तापमान कम होने पर बिजली की मांग घटने से विद्युत व्यवस्था को भी राहत मिलने की उम्मीद है। मरम्मत कार्य जारी बिजली निगम के अधिकारियों के अनुसार, रिकॉर्ड स्तर की मांग के बीच फॉल्ट की स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की टीमें लगाई गई हैं। जले हुए ट्रांसफॉर्मर और क्षतिग्रस्त केबलों को प्राथमिकता के आधार पर बदला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि मौसम विभाग का पूर्वानुमान सही रहा और बारिश हुई, तो बिजली की मांग घटने के साथ आपूर्ति व्यवस्था में भी सुधार आने की संभावना है।