हनुमानगढ़ में निजी स्कूलों को शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत मिलने वाली पुनर्भरण राशि करीब डेढ़ साल से अटकी है। इससे स्कूलों के सामने शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन देने के साथ बिजली, पानी और दूसरे बिल चुकाने का संकट है। दीपावली से पहले भुगतान नहीं हुआ तो स्कूलों के खर्च चलाना मुश्किल हो सकता है। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुरेश शर्मा ने बताया कि सेकेंडरी विभाग की पहली और दूसरी किश्त के 35-36 बिल ट्रेजरी के जरिए ईसीएस के लिए जयपुर भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद दूसरी किश्त का भुगतान नहीं हुआ है। जिले के सवा तीन सौ से ज्यादा स्कूलों का बजट खत्म हो चुका है। इस बारे में विभाग से संपर्क कर बजट की मांग भेजने को कहा गया है। जल्द भुगतान मिलने की उम्मीद एलीमेंट्री विभाग की पहली और दूसरी किश्त के सभी बिल भेजे जा चुके हैं। करीब 48 से 50 स्कूलों का भुगतान बाकी है। एलीमेंट्री विभाग के पास बजट उपलब्ध है, इसलिए इन स्कूलों को जल्द भुगतान मिलने की उम्मीद है। वहीं, सेकेंडरी विभाग का बजट आने में अभी समय लग सकता है। शर्मा ने बताया कि एसोसिएशन ने राज्य स्तर पर भी भुगतान के लिए प्रयास किए हैं। मुख्यमंत्री की जनसुनवाई में आश्वासन मिला है कि ट्रेजरी से ईसीएस के लिए जयपुर भेजे गए बिलों का भुगतान 5 नवंबर तक कर दिया जाएगा। निजी स्कूल संचालक इसी इंतजार में हैं। उन्होंने कहा कि 4 नवंबर से दीपावली की छुट्टियां शुरू हो रही हैं। स्कूल संचालकों के सामने शिक्षकों का वेतन, ड्राइवरों का भुगतान और बिजली-पानी व मोबाइल फोन के बिल चुकाने की चुनौती है। आर्थिक तंगी के कारण कई स्कूल इन खर्चों का भुगतान समय पर नहीं कर पा रहे हैं। अभिभावकों पर भी पड़ रहा आर्थिक असर सुरेश शर्मा ने बताया कि भुगतान में देरी का असर केवल स्कूल संचालकों तक सीमित नहीं है, बल्कि अभिभावक भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री पुनर्भरण योजना और भील कालीबाई योजना के तहत मिलने वाली राशि भी अभिभावकों की ओर बकाया है। अभिभावकों का कहना है कि जब राज्य सरकार से राशि मिलेगी, तभी वे स्कूलों को भुगतान कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि प्रत्येक निजी सेकेंडरी स्कूल में इन दोनों योजनाओं के तहत औसतन 20 से 25 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इन विद्यार्थियों की एवज में प्रत्येक स्कूल का करीब 2 से 2.50 लाख रुपए भुगतान बकाया है।