हनुमानगढ़ में धानका मजदूर यूनियन ने अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र जारी न होने के विरोध में धरना शुरू कर दिया है। इस आंदोलन के कारण इस साल गेहूं की सरकारी खरीद पर संकट गहरा गया है। यूनियन ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों की धान मंडियां अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी जाएंगी। धाणका मजदूर यूनियन के अध्यक्ष दर्शनलाल ने बताया कि धानका समाज के लोग बड़ी संख्या में इन दोनों जिलों में रहते हैं और उनका मुख्य कार्य धान मंडियों में मजदूरी करना है। समाज के लोगों को अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जा रहे हैं, जिससे उन्हें शिक्षा, सरकारी नौकरियों और अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यूनियन ने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 में राज्य सरकार ने प्रमाण पत्र जारी न करने के आदेश दिए थे, जो अब तक प्रभावी हैं। संगठन सदस्यों के अनुसार, इस मुद्दे पर 11 अगस्त 2025 से आंदोलन चल रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इस विरोध के तहत, 15 अप्रैल से हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर, दोनों जिलों की धान मंडियों में काम बंद रखने का निर्णय लिया गया है। यूनियन का दावा है कि इस आंदोलन को व्यापारियों, किसानों और अन्य मजदूर संगठनों का भी समर्थन प्राप्त है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि मंडियों का संचालन प्रभावित होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर गेहूं खरीद की पूरी प्रक्रिया पर पड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में खरीद संबंधी नियमों के विरोध में व्यापारियों, किसानों और मजदूरों द्वारा लगातार आंदोलन किया जा रहा था। मंगलवार को एक बड़ी सभा के बाद उन समस्याओं का समाधान हुआ था। अब धानक मजदूर यूनियन ने इस नए आंदोलन की घोषणा की है।