निकाय चुनाव में भाजपा करीब 40.84 प्रतिशत वार्ड ही जीत पाई थी। कांग्रेस 35 और निर्दलियों ने 24 प्रतिशत वार्डों पर कब्जा किया था। ऐसे में बीजेपी 60 प्रतिशत वार्ड हार गई थी। इसके बाद भी 200 से ज्यादा निकायों में बोर्ड बनाने में कामयाब रही है। कांग्रेस ने बीजेपी पर सत्ता के दुरुपयोग और पुलिस प्रशासन के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने निर्दलीयों पर दवाब बनाकर अपने बोर्ड बनाए हैं। इस पर बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री व प्रदेश निकाय प्रभारी हरीश द्विवेदी ने कहा- इतने बड़े पैमाने पर शायद ही किसी दल को जीत मिली हो। लगभग 22 प्रतिशत निर्दलीय चुनाव जीतें है, उसमें से 15 प्रतिशत से ज्यादा बीजेपी के कार्यकर्ता हैं, जिनको किसी कारण से टिकट नहीं मिल पाया था। वो चुनाव लड़े, जीते और फिर से बीजेपी में आ गए। BJP के राष्ट्रीय महामंत्री ने निकाय चुनावों में पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के बाद भी इतनी बड़ी संख्या में बोर्ड बनाने, कांग्रेस के आरोपों और निर्दलीयों को साधने की रणनीति को लेकर भास्कर से बात की। पढ़िए- हरीश द्विवेदी की भास्कर से बातचीत सवाल- निकाय चुनाव के परिणामों को आप किस तरह से देखते है? हरीश द्विवेदी- राजस्थान के निकाय चुनाव में जिस तरह से बीजेपी को ऐतिहासिक सफलता मिली है, मैं कह सकता हूं कि पिछले कई सालों में चाहे वह भारतीय जनता पार्टी की सरकार रही हो या फिर कांग्रेस पार्टी की सरकार। इतने बड़े पैमाने पर शायद ही किसी दल को जीत मिली हो। कहीं ना कहीं निकाय चुनाव के इस परिणाम ने संदेश दिया है कि राजस्थान की जनता ने भजनलाल सरकार और भारतीय जनता पार्टी को अपना पूर्ण आशीर्वाद देकर आने वाले समय में फिर से प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनाने का रास्ता साफ कर दिया हैं। सवाल- लेकिन अगर आंकड़े को देंखे तो बीजेपी 60 प्रतिशत से ज्यादा सीटें हारी हैं? जबकि शहरों को बीजेपी का गढ़ माना जाता है। हरीश द्विवेदी- जो स्थानीय निकाय का चुनाव होता है वह लोकलाइज्ड होता है। बीजेपी ने 42 प्रतिशत के आस-पास सीट जीती हैं। लोकतंत्र में बहुमत 50 प्रतिशत से तय नहीं होता हैं। अगर चार दल लड़ रहे हैं, तो जो सबसे ज्यादा सीटें जीतेगा, सरकार उसकी ही बनती है। इन चुनावों में लोकल मुद्दे भी होते हैं, निर्दलीय भी बड़ी संख्या में चुनाव लड़ते हैं। लगभग 22 प्रतिशत निर्दलीय चुनाव जीतें है, उसमें से 15 प्रतिशत से ज्यादा बीजेपी के कार्यकर्ता हैं, जिनको किसी कारण से टिकट नहीं मिल पाया था। वो चुनाव लड़े, जीते और फिर से बीजेपी में आ गए। 55 प्रतिशत से ज्यादा बीजेपी और बीजेपी समर्थित कैंडिडेट चुनाव जीतकर आए हैं, इसलिए मैंने कहा कि आप पिछले चुनाव का रिकॉर्ड उठाकर देखें तो उससे आपको स्पष्ट हो जाएगा कि शायद ही कोई राजनीतिक दल सिंबल पर इतने बड़े पैमाने पर जीतकर आया हो। प्रदेश की जनता ने केंद्र सरकार के 12 साल और प्रदेश सरकार के ढाई सालों के कामों पर मुहर लगाई हैं। सवाल- लेकिन इन चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस में 1 प्रतिशत से भी कम वोटों अंतर रहा है? हरीश द्विवेदी- मैंने कहा लोकतंत्र में जीत किसकी है, यह महत्वपूर्ण होता हैं। कई बार इस देश में ऐसा हुआ है कि वोट परसेंट हमको ज्यादा मिला हो, लेकिन सरकार दूसरे की बनी है, तो वोट प्रतिशत महत्वपूर्ण नहीं है, सीटें किसको ज्यादा मिली है, यह महत्वपूर्ण है। वोट प्रतिशत में एक परसेंट से कम नहीं, उससे ज्यादा का अंतर है और सीटों का अंतर 6 से 7 प्रतिशत का हैं। बोर्ड बनाने के बाद की स्थिति को देखेंगे तो हमारे और कांग्रेस में 75 प्रतिशत का अंतर हैं। सवाल- बीजेपी हमेशा कांग्रेस पर हॉर्स ट्रेडिंग और दलबदल का आरोप लगाती रही है, इस बार बीजेपी ने वहीं किया? हरीश द्विवेदी- आपको याद होगा जब हमारे मुख्यमंत्री ने रोड शो करना शुरू किया तो कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने कहना शुरू कर दिया कि अब भजनलाल सड़क पर आ गए। इनको रोड शो करने की क्या आवश्यकता है? जब परिणाम आ गए तो अशोक गहलोत ने कहा कि अगर कांग्रेस पार्टी भी एकजुट होकर रोड शो करती और चुनाव लड़ती तो अच्छा रिजल्ट आता। वो सीएम के रोड शो की आलोचना कर रहे थे, अब जब वह चुनाव हार जाते हैं तो कहते है कि एकजुट होना चाहिए। कांग्रेस पार्टी में केवल सिर फुटव्वल हैं, उनके यहां कोई एकता नहीं हैं। चुनाव में किसी भी राजनीतिक पार्टी का धर्म होता है कि वो पूरी ताकत से चुनाव लड़े। वो भी लड़ते, हमने उनको मना थोड़े ही किया था। जहां तक बात रही शासन-प्रशासन के दुरुपयोग की, तो हम किसी के पास नहीं गए। हमारे समर्थक, जिन्हें किसी वजह से टिकट नहीं मिला, वो लड़े ओर जीत गए। वह हमारे पास, अपने आप, आगे आकर हमको समर्थन देने आए, तो हम समर्थन नहीं लेंगे क्या? वो भी हमारी विचारधारा से जुड़े व्यक्ति से समर्थन क्यों नहीं लेंगे। हमने कांग्रेस पार्टी में कोई तोड़फोड़ नहीं की। निर्दलीय स्वतंत्र होता है, वो हमारे साथ आया। वो कांग्रेस में जाता तो उन्हें भी अच्छा लगता। कांग्रेस पार्टी अपनी कमियों को छिपाने के लिए अर्नगल प्रलाप कर रही हैं। उनमे आपस में बहुत मतभेद हैं। उनके लिए रिजल्ट खराब आया है तो उसे छिपाने के लिए हम पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगा रही हैं। ये लोग चार-पांच दिन पहले स्टेटमेंट दे रहे थे कि भजनलाल सरकार के अधिकारी उन्हें रिपोर्ट करते हैं, आज अपना बयान बदल रहे है। अधिकारी अगर आपको रिपोर्ट कर रहे है तो हम कैसे दुरुपयोग कर सकते हैं। सवाल- जिन जगहों पर आप हारें है, वहां किसी की जिम्मेदारी तय होगी? हरीश द्विवेदी- जिम्मेदारी तय करने की, अभी कोई विषय ही नहीं है। अभी हम जीत का जश्न मनाएंगे। हमारी पार्टी की विशेषता है कि हम जीतते है तो भी उसकी समीक्षा करते हैं, कि कैसे हम ओर प्रभावी तरीके से जीत सकते थे। हमारा विशेष प्रकार का दल है, जिसमें हम जीत और हार दोनों की समीक्षा करते हैं।