6 महीने से मां की राह देख रहे दोनों बेटों को जब रुद्रा सामने नजर आई तो वे दौड़कर उससे लिपट गए। मां के सीने से लगकर बच्चे रोने लगे, तो वहां मौजूद परिवार के लोगों की आंखें भी भर आईं। रुद्रा भी अपने पति और बेटों से मिलकर भावुक हो गई। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह परिवार से बिछड़ गई थी। पति और परिजनों ने उसे तलाशने में कोई कसर नहीं छोड़ी और गुमशुदगी की FIR भी दर्ज करवाई। 5 अप्रैल 2026 को रुद्रा को 6 महीने के बेटे टोरीशा के साथ नोएडा से रेस्क्यू किया गया था। इलाज के बाद उसे परिवार से मिलाने में भरतपुर के अपना घर आश्रम ने मदद की। 6 महीने पहले छोटे बेटे को लेकर घर से निकली थी भरतपुर के अपना घर आश्रम के सचिव नरेंद्र तिवारी ने बताया - करनाल निवासी रुद्रा 6 महीने पहले अपने 6 महीने के बेटे टोरीशा को लेकर घर से निकल गई थी। उस समय उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। उसके घर से निकलने के बाद पति प्रदीप और परिजनों ने उसे काफी तलाश किया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। दोनों बेटे मां को याद कर रोते थे रुद्रा अपने दो बेटों आशिफ (5) और कार्तिक (3) को घर पर छोड़ आई थी। दोनों बच्चे जब अपनी मां को याद करते और रोते थे, तो परिजन भी भावुक हो जाते थे। परिवार ने रुद्रा की गुमशुदगी की FIR भी दर्ज करवाई थी। इसके बावजूद लंबे समय तक उसका कोई पता नहीं चल पाया। 5 अप्रैल को बेटे के साथ अपना घर आश्रम लाई गई 5 अप्रैल 2026 को रुद्रा को उसके बेटे टोरीशा के साथ नोएडा से रेस्क्यू किया गया था। इसके बाद दोनों को भरतपुर के अपना घर आश्रम लाया गया। यहां रुद्रा का इलाज शुरू किया गया और उसके बेटे की देखरेख की जाने लगी। इलाज के बाद परिवार के बारे में बताया आश्रम में इलाज के दौरान धीरे-धीरे रुद्रा की मानसिक स्थिति में सुधार हुआ। इसके बाद उसने आश्रम की टीम को अपने परिवार के बारे में बताया। टीम ने उसके ससुराल वालों से संपर्क किया। रुद्रा के सुरक्षित होने की जानकारी मिलने पर परिवार के लोग उससे मिलने और उसे घर ले जाने के लिए भरतपुर पहुंचे। बेटों को सीने से लगाया तो नम हो गईं सबकी आंखें गुरुवार को रुद्रा का पति प्रदीप, उसके दोनों बेटे आशिफ और कार्तिक, भाई संदीप और देवर हार्दिक उसे लेने अपना घर आश्रम पहुंचे। जैसे ही रुद्रा ने अपने दोनों बेटों को देखा, उसने उन्हें सीने से लगा लिया। 6 महीने बाद रुद्रा को सुरक्षित देखकर परिवार के सदस्यों की आंखें भी नम हो गईं। आश्रम में परिवार से मिलने के बाद परिजन उसे अपने साथ घर ले गए। इस दौरान अपना घर आश्रम के संस्थापक बीएम भारद्वाज भी रुद्रा से मिले।