भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा ​ब्रह्माजी व भगवान विष्णु चार हाथ में दर्शन देते हैं, पर शिव दो हाथ में दर्शन देते हैं। क्यों? किसी ने पूछा कि भगवान शंकर अपने दो हाथ क्यों रखते हैं? तो शिवजी से मां पार्वती ने भी कहा कि ब्रह्माजी चार हाथ रखते हैं, भगवान विष्णु चार हाथ रखते हैं, सब देवता चार हाथ रखते हैं, आप दो हाथ रखते हो, क्यों? तो शिवजी ने कहा 'मैंने अपने दो हाथों से एक संपन्न व्यक्ति को पकड़ रखा है और एक प्रपन्न व्यक्ति को पकड़ रखा है।' जिसने जिंदगी में संपन्न और प्रपन्न, दोनों को पकड़ रखा है, उसी ने प्रसन्नता में जीना प्रारंभ किया है। वर्तमान स्थिति और समय में व्यक्ति प्रपन्न व्यक्ति को कम और संपन्न को ज़्यादा पकड़ता है। थोड़ा-सा पैसे वाला तुम्हारा रिश्तेदार होगा तो तुम उसका गुणगान करना प्रारंभ कर दोगे। अरे! वो जयपुर में है ना, जिसका सोने-चांदी का काम है, वो हमारा मौसी का छोरा है। अरे! वो वहां पर जो वो है ना मंत्री, वो हमारे काकाजी का लड़का है। आज के समय में जितने मिलते हैं, वो संपन्न व्यक्ति का परिचय देते हैं। एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं मिला, जो प्रपन्न व्यक्ति का परिचय दे। दुनिया संपन्न व्यक्ति का परिचय देती है पर प्रपन्न का परिचय नहीं देते और देवों के देव महादेव हैं जो संपन्न को भी पकड़ते हैं और प्रपन्न को भी पकड़ते हैं और बीच में आनंद पाते हैं। यह बात आजादनगर स्थित मेडिसिटी ग्राउंड में संकटमोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबूगिरी महाराज के सानिध्य में िशव महापुराण कथा कर रहे पंडित प्रदीप मिश्रा ने कही। उन्होंने कहा कि शिवजी लंका के राजा रावण के गुरु बनते हैं, यदि लंका के राजा रावण को सोने की लंका देते हैं, तो भस्मासुर को भी भस्म करने का आशीर्वाद देते हैं। उनके पास संपन्न और प्रपन्न, दोनों ही बराबर हैं। शिव के लिए करोड़पति और गरीब दोनों कंकड़ ​पंडित मिश्रा ने कहा कि व्यक्ति करोड़पति है तो भी शिव के लिए कंकड़ है और गरीब है तो भी कंकड़ ही है। शिव के लिए कोई बड़ा-छोटा नहीं है। अरणी यवतमाल की कथा में कहा था ​शिव को जितना चांदी व सोने के लोटे का जल प्रिय नहीं है, शिव को जितना कांसे के लोटे का जल प्रिय नहीं, लेकिन शिव को तांबे के लोटे का जल प्रिय है। ​भविष्य पुराण में लिखा है कि चरण उसके छूना जिसके आचरण अच्छे हों। जिसके आचरण अच्छे न हों, तो वह कितनी भी ऊंची गद्दी पर क्यों न बैठा हो, उसके चरण छूने की जरूरत नहीं है। अपने माता-पिता और पति के चरण छुओ। आचरण की श्रेष्ठता है, तो चरण की श्रेष्ठता है। ​चरण छूने का मतलब है कि आप हमेशा याद रखो, केवल घर के बुजुर्गों के, माता-पिता के और अपने पति के चरण छुओ।