प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव तय समय पर नहीं कराने पर राज्य चुनाव आयोग और सरकार के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई टल गई। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ के मंगलवार को एक्सेप्शन (सुनवाई से इनकार) करने से यह सुनवाई टल गई। अब मामले में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर नई बेंच का गठन होगा। नई बेंच 16 जुलाई को मामले में सुनवाई करेगी। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा ने सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट ने फैसले में कहा था कि शहरी निकायों का वार्ड परिसीमन और मतदाता सूची का संशोधन 20 जून तक पूरा किया जाए और संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया 31 जुलाई तक पूरी कर ली जाए। इसके बावजूद अभी तक चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। याचिका में राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह, सचिव राजेश वर्मा, पंचायतीराज आयुक्त डॉ. जोगाराम और स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक प्रतीक चंद्रशेखर जुईकर को पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट से मांग की गई है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई करके उन्हें दंडित किया जाए। साथ ही 31 जुलाई तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिए जाए। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे अधिकारी याचिका में कहा गया कि विभिन्न विभागों के बीच हुए पत्राचार में अधिकारी अभी भी राजस्थान पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करने पर अड़े हुए हैं। जबकि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि आयोग की रिपोर्ट का इंतजार नहीं किया जाए। चुनाव को किसी भी आधार पर आगे नहीं टाला जाए। हाईकोर्ट का आदेश सभी अधिकारियों पर बाध्यकारी था, लेकिन अधिकारियों ने उदासीनता और गैर-जिम्मेदार रवैये से अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना की है। हमने 1 जुलाई को संबंधित अफसरों को अवमानना का कानूनी नोटिस भी दिया था, लेकिन उसका भी कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। सरकार ने दायर किया प्रार्थना पत्र वहीं अवमानना याचिका पर सुनवाई से पहले सरकार ने हाईकोर्ट में चुनाव टालने के लिए प्रार्थना पत्र दायर कर दिया है। सरकार ने प्रार्थना पत्र में ओबीसी आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग के साथ हुए पत्राचार की डिटेल देते हुए कोर्ट से चुनाव टालने की मांग की है। सरकार ने कहा कि अभी तक ओबीसी आयोग से राजनीतिक आरक्षण की रिपोर्ट नहीं मिली है। प्रदेश में ओबीसी की जनसंख्या 50 प्रतिशत है। ऐसे में उनके राजनीतिक आरक्षण का निर्धारण किए बिना चुनाव कराना उचित नहीं होगा। इसलिए चुनाव कराने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। चुनाव प्रक्रिया में 90 दिन का समय लगेगा सरकार ने निर्वाचन आयोग द्वारा पंचायतीराज विभाग को लिखे पत्र का हवाला देते हुए कहा- राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि ओबीसी आरक्षण की जानकारी मिलने के बाद निर्वाचन आयोग को चुनाव प्रक्रिया पूरी करने में करीब 90 दिन का समय लगेगा। आयोग ने नगरीय निकायों के चुनाव दो चरणों में कराने के लिए 40 दिन और पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव चार चरणों में कराने के लिए 50 दिन का समय मांगा है। सरकार के इस जवाब से पता चलता है कि अगर सरकार 31 अगस्त तक आरक्षणवार विवरण राज्य निर्वाचन आयोग को सौंप देती है तो आयोग सितंबर से नवंबर तक पंचायत-निकाय चुनाव करा लेगा। कोर्ट ने दिए थे 31 जुलाई तक चुनाव कराने के आदेश राजस्थान हाईकोर्ट ने पहले आयोग और सरकार को 15 अप्रेल तक प्रदेश में निकाय-पंचायत चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार और आयोग ने अदालत में प्रार्थना पत्र लगाकर चुनाव टालने की अपील की थी। प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने समय देते हुए 31 जुलाई तक हर हाल में चुनाव कराने के लिए कहा था। वहीं ओबीसी आयोग को भी 20 जून तक अपनी रिपोर्ट देने के लिए बोला था।