राजस्थान की अदालतों में केंद्रीय मंत्री, सांसद, पूर्व सांसद, पांच मंत्रियों, 13 विधायकों और 13 पूर्व MLA के खिलाफ केस कई साल से पेंडिंग या अंडर ट्रायल हैं। इनमें बीजेपी के 6, कांग्रेस के 5, बीएपी का एक और एक निर्दलीय विधायक शामिल है। कोई केस गवाह नहीं आने के कारण पेंडिंग चल रहा है। किसी के खिलाफ सीबीआई में तो किसी के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस चल रहा है। हाईकोर्ट मौजूदा और पूर्व सांसद, विधायकों के खिलाफ अदालतों में पेंडिंग चल रहे आपराधिक मुकदमों की लगातार मॉनिटरिंग कर हर महीने रिपोर्ट भी ले रहा है। हाईकोर्ट की 30 जून तक मौजूदा और पूर्व सांसद-विधायकों के खिलाफ पेंडिंग मुकदमों की स्टेटस रिपोर्ट जारी की गई है। इसके अनुसार मौजूदा और पूर्व विधायकों के खिलाफ 41 आपराधिक केस पेंडिंग हैं। हाईकोर्ट ट्रायल कोर्ट से लेकर जिला अदालतों से सांसद-विधायकों के पेंडिंग आपराधिक मामलों की लगातार मॉनिटरिंग कर उन्हें जल्द निपटाने के निर्देश जारी कर चुका है। इन केंद्रीय मंत्री और राजस्थान के मंत्रियों के खिलाफ केस पेंडिंग केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत : जोधपुर के एडीजे कोर्ट-1 में 2023 से केस पेंडिंग है। केस बहस के स्तर पर है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा : थानागाजी एसीजेएम कोर्ट में 2022 से केस गवाह नहीं आने के कारण लंबित। रेलवे कोर्ट का केस हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के कारण लंबित है। गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम : गोपालगढ़ दंगे के मामले में जयपुर के एडीजे कोर्ट-4 में 2012 से मामला लंबित है। सीबीआई ने केस दर्ज किया था। यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा : एसीडी कोर्ट सीकर में 2021 से भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला लंबित है। हाईकोर्ट से स्टे होने के कारण केस में आगे प्रोग्रेस नहीं हुई। जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी : एसीजेएम कोर्ट मालपुरा में 2023 से केस पेंडिंग है। मामले में सभी आरोपी पेश नहीं हुए और गवाही नहीं हुई। ऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर : जुलाई 2023 से कोटा के कनवास जूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में केस पेंडिंग है। गवाही पूरी नहीं हुई। एक निर्दलीय और एक बीएपी विधायक के खिलाफ केस निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी : दो केस पेंडिंग हैं। सीजेएम जोधपुर मेट्रो कोर्ट में दिसंबर 2012 से मामला लंबित है। मामले में गवाही पूरी नहीं हुई। एसीजेएम कोर्ट में 2023 से एक केस लंबित है। बीएपी विधायक उमेश डामोर : 2022 से डूंगरपुर एडीजे कोर्ट में एक केस पेंडिंग है। गवाही जारी है। इन बीजेपी विधायकों के खिलाफ केस पेंडिंग जितेंद्र गोठवाल: एडीजे कोर्ट लालसोट में दो मामले पेंडिंग। 2022 में डॉक्टर सुसाइड केस से जुड़े मामले में हाईकोर्ट से स्टे होने के कारण केस आगे नहीं बढ़ा। नवंबर 2024 के मामले में अभी गवाही जारी है। जयदीप बिहाणी: एडीजे कोर्ट श्रीगंगानगर में 2023 से केस पेंडिंग है। एसीजेएम कोर्ट श्रीगंगानगर में लंबित मामले में बेलेबल वारंट जारी है। गोपाल शर्मा: जयपुर के एसीजेएम कोर्ट-11 में 2006 से केस पेंडिंग है। कालीचरण सराफ: जयपुर में सांप्रदायिक दंगों से जुड़े कोर्ट में 2022 से केस पेंडिंग है। मामले में गवाह और बहस जारी है। शांता देवी: सराड़ा कोर्ट में 2020 से मामला लंबित, फाइनल बहस होना बाकी है। राजेंद्र गुर्जर: सीजेएम कोर्ट मालपुरा में 2023 से केस पेंडिंग है। मामले में सभी आरोपी पेश नहीं हुए, गवाहों के बयान बाकी हैं। इन कांग्रेस विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले पेंडिंग शांति धारीवाल: एसीडी कोर्ट जयपुर में 2016 से केस लंबित है। एकल पट्टा मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद नए सिरे से जांच के आदेश दिए गए हैं। कांति प्रसाद मीणा: थानागाजी एसीजेएम कोर्ट में 2022 से केस लंबित है। मामले में गवाही जारी है। गवाहों के बयान पूरे होने के बाद ही केस आगे बढ़ेगा। अशोक चांदना: एसीडी श्रीगंगानगर में 2015 से केस पेंडिंग है। अभी गवाहों के बयान जारी हैं। रामनिवास गावड़िया: एसीजेएम कोर्ट जयपुर में 2016 से केस लंबित है। केस में अभी फाइनल बहस बाकी है। इसके बाद फैसला होगा। एक दूसरा केस एसीजेएम कोर्ट 14 में लंबित है, जिस पर हाईकोर्ट से स्टे है। ललित यादव: जयपुर के एसीजेएम कोर्ट में दिसंबर 2018 से मामला लंबित है। गवाह पेश नहीं होने से सुनवाई आगे नहीं बढ़ी। जयपुर, बांसवाड़ा, जोधपुर और श्रीगंगानगर की अदालतों में सबसे ज्यादा मामले बांसवाड़ा, जयपुर, जोधपुर और श्रीगंगानगर की अदालतों में मौजूदा और पूर्व विधायकों के खिलाफ सबसे ज्यादा मामले लंबित हैं। इनमें जयपुर की अदालतों में सबसे ज्यादा 11 मामले लंबित हैं, जिनमें जयपुर मेट्रो-I कोर्ट में 5, जयपुर मेट्रो-II कोर्ट और जयपुर डिस्टिक्ट्र कोर्ट में 3-3 मामले लंबित हैं। बांसवाड़ा कोर्ट में 8, कोटा में 4, जोधपुर मेट्रो कोर्ट में 4, श्रीगंगानगर में 4 और दौसा में 2 आपराधिक मामले लंबित हैं। 10 जिलों में 1-1 मामला लंबित अलवर, डूंगरपुर, जैसलमेर, करौली, कोटपूतली-बहरोड़, मेड़ता, सलूंबर, सीकर, टोंक और उदयपुर : इन सभी जिलों में 1-1 मामला लंबित है। 10 जिलों की अदालतों में कोई मामला पेंडिंग नहीं अजमेर, बाड़मेर, भीलवाड़ा, बीकानेर, चूरू, धौलपुर, हनुमानगढ़, पाली, प्रतापगढ़ और राजसमंद में नेताओं के खिलाफ अदालतों कोई भी मामला लंबित नहीं है।