राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में तय समय पर पंचायत और निकाय चुनाव नहीं कराने पर सरकार पर नाराजगी जताई। बैंच ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार का यह रवैया ठीक नहीं है। हम पहले ही पर्याप्त समय दे चुके हैं, लेकिन सरकार लगातार चुनाव टालती जा रही है। सरकार की ओर से महाधिवक्ता (एजी) राजेन्द्र प्रसाद ने कोर्ट को बताया कि निकाय चुनावों में वार्डों के आंतरिक परिसीमन को लेकर हाईकोर्ट के दो अलग-अलग फैसले आने से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई है। दरअसल, प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव टालने को लेकर राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग की ओर से दायर प्रार्थना पत्र पर सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया। पंचायत के चुनाव क्यों नहीं कराए-हाईकोर्ट बेंच ने कहा-आदेश निकायों को लेकर था, आपने पंचायत के चुनाव क्यों नहीं कराए। इस पर महाधिवक्ता ने कहा कि ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट नहीं आने के कारण इलेक्शन नहीं करवा पा रहे हैं। हमने 9 मई 2025 को ही ओबीसी आयोग का गठन कर दिया था। लेकिन आयोग ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए बार-बार समय की मांग की है, जिससे उसका कार्यकाल समय-समय पर बढ़ाया गया। बेंच ने कहा कि ओबीसी कमीशन कर क्या रहा है, वो हमारे सामने नहीं है, वरना हम उसे भी निर्देश देते। कोर्ट ने दिए थे 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के आदेश दिए थे राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को प्रदेश में 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। वहीं, सरकार को 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा था। इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई के समय कोर्ट ने भी राज्य में 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के लिए कहा था। लेकिन अब सरकार और चुनाव आयोग ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर करके चुनाव के लिए और समय देने की मांग की हैं। वहीं दूसरी ओर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज देवंदा ने चुनाव आयोग के खिलाफ अवमानना याचिका दायर करके कार्रवाई की मांग की है। इस पर हाईकोर्ट में 18 मई को सुनवाई होगी। वन स्टेट-वन इलेक्शन की धारणा को भी बल मिलेगा सरकार की ओर से कहा गया था कि सितंबर से दिसंबर के बीच में कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद चुनाव कराना बेहतर होगा। इससे वन स्टेट-वन इलेक्शन की धारणा को भी बल मिलेगा। प्रार्थना पत्र में सरकार ने कहा-कोर्ट के आदेश की पालना के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां ऐसी हैं कि 15 अप्रैल तक चुनाव कराया जाना संभव नहीं था। सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट, स्कूल, स्टाफ, ईवीएम सहित अन्य संसाधनों की उपलब्धता का हवाला देकर हाईकोर्ट से चुनाव आगे खिसकाने का अनुरोध किया है। राज्य चुनाव आयोग ने समर्थन किया राज्य चुनाव आयोग ने भी हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर करके चुनाव टालने का अनुरोध किया है। अपनी एप्लीकेशन में आयोग ने चुनाव की तिथियां बढ़ाने के सरकारी तर्कों का समर्थन करते हुए कहा है कि ओबीसी रिजर्वेशन के निर्धारण से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है। --- ये खबर भी पढ़ें 30 साल बाद बदला भैरोंसिंह शेखावत सरकार का फैसला:दो से ज्यादा बच्चों वाले भी लड़ सकेंगे निकाय-पंचायत चुनाव; संशोधन बिलों को कैबिनेट की मंजूरी प्रदेश में अब दो से ज्यादा संतान वाले भी पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनाव लड़ सकेंगे। कैबिनेट की बैठक में भैरोंसिंह शेखावत सरकार का फैसला 30 साल बाद बदल दिया गया है। इससे निकाय और पंचायतीराज की सियासत बदलेगी। (पूरी खबर पढ़ें) निर्वाचन आयोग की घोषणा से राजस्थान सरकार बैकफुट पर:वन स्टेट-वन इलेक्शन का फॉर्मूला फेल, निकाय चुनाव की तैयारियां शुरू, जानें- कब होंगे प्रदेश के शहरी निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव जल्द होने वाले हैं। राज्य निर्वाचन आयोग अगले सप्ताह इसकी घोषणा कर सकता है। इधर, इस फैसले के बाद सरकार की 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' की घोषणा को झटका लगा है और अब यह पूरी नहीं होगी। (पूरी खबर पढ़ें)