राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) द्वारा कर्मचारियों पर हर माह 3000 किलोमीटर बस संचालन का अनिवार्य लक्ष्य थोपने और इसके आधार पर वेतन रोकने के मामले में हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। राजस्थान रोडवेज कॉर्पोरेशन जॉइंट एम्प्लॉइज फेडरेशन की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने रोडवेज प्रबंधन से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनायक कुमार जोशी ने पक्ष रखा। रोडवेज की ओर से अधिवक्ता राजपाल धनखड़ ने नोटिस स्वीकार करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा ने बताया कि औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत रोडवेज में स्थायी आदेश 1965 लागू हैं। श्रम विभाग की मंजूरी के बिना इनमें बदलाव अवैध है। इसके बावजूद प्रशासन ने मनमाने तरीके से हर माह 3000 किमी ड्यूटी का आदेश जारी किया। इसके आधार पर 150 कर्मचारियों का पिछले पांच महीने से वेतन रोका गया है, जबकि कर्मचारी 30 दिन कार्य कर रहे हैं।