भरतपुर| अस्पताल में किसी मरीज की हालत गंभीर होने पर आईसीयू में समय पर इलाज मिलना उसकी जान बचाने के लिए अहम होता है। ऐसे में आईसीयू में जरूरी उपकरण, प्रशिक्षित डॉक्टर-स्टाफ और दूसरी मूलभूत सुविधाएं कितनी उपलब्ध हैं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय ने भरतपुर सहित प्रदेश के जिला अस्पतालों से आईसीयू की स्थिति और संसाधनों की जरूरत का ब्योरा मांगा है। निदेशालय की ओर से हाल में जारी पत्र के अनुसार अस्पतालों को आईसीयू लेवल-1, लेवल-2 और लेवल-3 की प्रगति रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इसके साथ ही उपकरणों, मानव संसाधन और मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता से संबंधित जानकारी देनी होगी। जिन संसाधनों की जरूरत है, उनके लिए मांग पत्र और प्रस्ताव भी तैयार करने होंगे। रिपोर्ट हार्डकॉपी और सॉफ्टकॉपी दोनों में प्रस्तुत करनी होगी। कल जयपुर में देना होगा ब्योरा निदेशालय ने पहले 10 सितंबर को परिपत्र जारी कर 30 सितंबर तक सूचना मांगी थी। इसके बाद 18, 24 और 28 सितंबर को स्मरण पत्र भी जारी किए गए। इसके बावजूद सूचना उपलब्ध नहीं होने पर अब जिला अस्पतालों के प्रमुख चिकित्सा अधिकारियों को निर्धारित तारीखों पर जयपुर में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। भरतपुर और कोटा के जिला अस्पतालों के प्रमुख चिकित्सा अधिकारियों को 15 अक्टूबर को बुलाया गया है। यह कवायद आईसीयू सेवाओं के संगठन और संचालन से जुड़ी वर्ष 2026 की गाइडलाइन तथा सुप्रीम कोर्ट के 13 अगस्त 2026 के निर्देशों के संदर्भ में की जा रही है। अस्पतालों से प्राप्त रिपोर्ट और संसाधनों की मांग के आधार पर आईसीयू सेवाओं की मौजूदा स्थिति तथा आवश्यकताओं का आकलन किया जा सकेगा।