सऊदी अरब का कच्चा तेल लेकर भारत और चीन जा रहे दो तेल टैंकरों ने मंगलवार को रेड सी (लाल सागर) में यू-टर्न लेकर अपना रास्ता बदल लिया। दोनों जहाज बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद वापस स्वेज नहर की ओर मुड़ गए। दरअसल, हूती विद्रोहियों ने सोमवार को सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी का ऐलान किया था। इसके बाद उन्होंने दुनियाभर की शिपिंग कंपनियों को ईमेल भेजकर चेतावनी दी कि सऊदी अरब के किसी भी बंदरगाह पर माल लादने या उतारने वाले जहाजों को उनकी सैन्य पहुंच के भीतर कहीं भी निशाना बनाया जा सकता है। रॉयटर्स के मुताबिक, इनमें से एक सुपर टैंकर 'शिन लॉन्ग यांग' सोमवार को सऊदी अरब के यनबू बंदरगाह से करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर चीन के लिए रवाना हुआ था। जहाज मंगलवार सुबह बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट पहुंचने से पहले ही रुक गया और फिर यू-टर्न लेकर स्वेज रूट की तरफ मुड़ गए। भारत से जुड़ा दूसरा टैंकर भी इसी तरह अपना रास्ता बदलकर उत्तर की ओर चला गया। होर्मुज बंद तो बाब अल-मंदेब पर निर्भर है सऊदी होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद सऊदी अरब अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए तेल को रेड सी के यनबू बंदरगाह तक पहुंचाकर वहां से एशियाई देशों को भेज रहा है। अगर जहाज बाब-अल-मंदेब का रास्ता छोड़ते हैं, तो उन्हें स्वेज नहर और फिर अफ्रीका के लंबे समुद्री मार्ग का सहारा लेना पड़ सकता है। इससे यात्रा की दूरी हजारों मील बढ़ जाएगी, माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी और भारत, चीन समेत एशियाई देशों तक तेल पहुंचने में अधिक समय लगेगा। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। ईरान जंग से जुड़े सभी अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…