ब्यावर |समता भवन में आचार्य रामेश के शिष्य शासन दीपक श्रुत प्रभ महाराज ने बताया कि भगवान महावीर का जीवन हमें यह शिक्षा देता है कि आत्मा कर्मों से भारी है। हम सब अपने कर्मों पर छोड़ देते हैं। हम मोहनीय कर्म से हार जाते हैं। मोह से सर्दी-गर्मी सहन नहीं कर पाते। यह कर्म सबसे भारी है। कर्म पुद्गल है। हमने इन पुद्गलों को पकड़ रखा है। हम इसके गुलाम बनते जा रहे हैं। सारी समस्या मोहनीय कर्म कराता है। महाराज ने कहा कि व्यक्ति में अहंकार मोहनीय कर्म लाता है। उसे हम छोड़ नहीं पा रहे हैं। पहले जन्म में पुण्य का सदुपयोग किया। इसी कारण हमें जैन धर्म वापस मिला। इस जन्म का सदुपयोग नहीं किया तो वापस वहीं के वहीं रह जाएंगे। महाराज ने बताया कि भीतर ब्रह्मचर्य की शक्ति बढ़े। तभी हमारी आसक्ति छूटेगी। भगवान महावीर का नाम ही ऐसा है। इनका नाम लेने से हम सब निहाल हो जाते हैं। हम तिर जाते हैं। माह में एक दिन मोह छोड़ने का प्रयास करें। तभी हमारी भलाई होगी। इससे पहले शासन दीपिका विद्यावती महाराज ने समझाया कि कर्मों का खिलाड़ी खिलाए अच्छा खेल। जग की सारी शक्ति इसके आगे फेल... कर्मों का खिलाड़ी खेल खिला रहा है। घबराओ नहीं।