राजस्थान के करीब 14 लाख सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स की स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी आरजीएचएस (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार इस योजना को बीमा (इंश्योरेंस) मॉडल पर ले जाने की तैयारी कर रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो इलाज का पूरा सिस्टम बदल जाएगा। अभी इस योजना में सरकार सीधे अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स को भुगतान करती है और कर्मचारी-पेंशनर्स को कैशलेस इलाज मिलता है। लेकिन लंबे समय से भुगतान में देरी बड़ी समस्या बन गई है। निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर का कहना है कि उनके करोड़ों रुपए महीनों से बकाया हैं। कई मामलों में 8 से 9 महीने तक भुगतान अटका रहता है, जिससे कैशलेस इलाज प्रभावित हो रहा है। इसी को देखते हुए सरकार अब बीमा मॉडल लाने की तैयारी में है। इसमें बीमा कंपनी अस्पतालों को भुगतान करेगी। सरकार का मानना है कि इससे भुगतान समय पर होगा, अस्पतालों का भरोसा बढ़ेगा और मरीजों को बिना परेशानी इलाज मिल सकेगा। सरकार का तर्क कर्मचारियों की आशंका दो चरणों में लागू होगी योजना इस बदलाव को दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में पेंशनर्स शामिल होंगे। इसके बाद व्यवस्था ठीक रहने पर कर्मचारियों को भी जोड़ा जाएगा। इधर, सरकार ने कुछ कर्मचारी संगठनों से राय मांगी तो उन्होंने इसका विरोध जताया। उनका कहना है कर्मचारी हर महीने योजना में योगदान देते हैं, ऐसे में बीमा कंपनियों को देना ठीक नहीं है। हमने आरजीएचएस का घाटा 700 करोड़ रुपए कम कर दिया है। योजना को इंश्योरेंस मोड पर लाएंगे। इससे फर्जीवाड़ा बंद होगा। अगले 6-8 महीने में सारा घाटा खत्म कर देंगे। -गजेंद्र सिंह खींवसर, चिकित्सा मंत्री