नगर निगम में 340 कर्मचारी पांच साल से एक ही शाखा में जमे हैं। इसका असर फाइलों के निस्तारण पर पड़ रहा है। 2 हजार से ज्यादा फाइलें पेंडिंग हैं। कर्मचारियों पर फाइलों में अनावश्यक टिप्पणियां करने और उन्हें आगे बढ़ाने के बजाय अटकाने की शिकायतें हैं। पशु शाखा-7, राजस्व-10, आयोजना-13, स्लॉटर हाउस-17 फायर-23, उद्यान -12, भवन निर्माण स्वीकृति -15, पट्टे-23, अतिक्रमण -34, लाइसेंस -12, स्टोर-10, गैराज-23 और पंजीयन शाखा में कर्मचारी लंबे समय से एक ही जगह तैनात हैं। इसमें से अधिकतर कर्मचारी जोनों में लगे हुए हैं। यही स्थिति आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त और उपायुक्त कार्यालयों में भी है। ऐसे में कार्यप्रणाली में बदलाव और जवाबदेही तय करने की जरूरत पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, परिवहन विभाग के आरटीओ-डीटीओ कार्यालयों में कर्मचारियों की सीट एक साल में और इंस्पेक्टरों की 6 महीने में बदलने की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को अलग-अलग सीटों पर काम का अनुभव देना और एक जगह लंबे समय तक जमे रहने से पैदा होने वाली एकाधिकार की स्थिति को कम करना है। फाइलों में उलझे मामले, जनता काट रही चक्कर विभिन्न शाखाओं में फाइलें अटकने से आम लोगों को परेशानी हो रही है। पट्टे, भवन निर्माण स्वीकृति, राजस्व और लाइसेंस से जुड़ी फाइलें अटकने से लोगों को बार-बार निगम कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। फाइलों पर अनावश्यक टिप्पणी और देरी की शिकायतें व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं। निगम में एसीबी की कार्रवाई निगम में 6 माह में एसीबी ने 5 कार्रवाईयां कर 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। मई में वेतन बनाने की एवज में स्वास्थ्य निरीक्षक और एक निजी व्यक्ति को। जून में दुकान का लाइसेंस जारी करने की एवज में पशुधन निरीक्षक को। जुलाई में मकान का पट्टा जारी करने की एवज में हवामहल-आमेर जोन के जमादार को। जुलाई में कोटा एसीबी ने मैरिज रजिस्ट्रार और एक अन्य कर्मचारी को। जून/अक्टूबर में कनिष्ठ अभियंता तथा संविदाकर्मियों और अन्य से जुड़े मामलों में कार्रवाई की। मेरे जॉइन करने के बाद मैंने अधिकतर की सीट बदली है। इसके बावजूद कोई कर्मचारी लंबे समय से एक ही सीट पर है और रह गया है, तो उसे भी बदल दिया जाएगा। -ओम प्रकाश कसेरा, आयुक्त निगम