जयपुर सहित देश के कई बड़े शहरों में तेजी से बढ़ते होटल और खाद्य क्षेत्र के बीच अब पशु कल्याण को लेकर जागरूकता भी बढ़ रही है। इसी कड़ी में पशु समानता की पहल के चलते भारत की कई बड़ी आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) कंपनियों ने पिंजरा-मुक्त (केज-फ्री) अंडों की ओर महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं। यह बदलाव मुर्गियों पर होने वाली क्रूरता को कम करने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है। पुणे स्थित इस संस्था ने अंडा फार्मों में मुर्गियों के साथ होने वाली गंभीर क्रूरता को उजागर किया था। इसके बाद संस्था ने विभिन्न खाद्य और होटल कंपनियों से अपील की कि वे मुर्गियों को पिंजरों में बंद रखने की प्रथा को समाप्त करें। संस्था की कार्यकारी निदेशक अमृता उबाले ने कहा कि यह प्रथा ‘पांच स्वतंत्रताओं’ (फाइव फ्रीडम्स) और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 का उल्लंघन है। कई होटल्स 100% पिंजरा-मुक्त अंडों का कर रहे उपयोग इस पहल के तहत हयात रीजेंसी चेन्नई, द लीला पैलेस जयपुर, ट्राइडेंट हैदराबाद, जियो वर्ल्ड मुंबई, ले मेरिडियन गोवा और हयात सेंट्रिक गोवा जैसी कंपनियां अब 100% पिंजरा-मुक्त अंडों का उपयोग कर रही हैं। इसके अलावा 17 अन्य कंपनियां, जिनमें हिल्टन होटल्स एंड रिसोर्ट और द इम्पीरियल, नई दिल्ली शामिल हैं। 40% से ज्यादा पिंजरा-मुक्त बदलाव कर चुकी हैं, जिससे 1,01,771 मुर्गियों को लाभ मिला है। वहीं 42 नई कंपनियां, जैसे आईबिस होटल्स और नोवोटेल होटल्स इस दिशा में कदम बढ़ा रही हैं, जिससे 2,33,014 मुर्गियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसके साथ ही अंडा उत्पादकों को भी प्रेरित किया गया है, जिससे 34,000 मुर्गियों को लाभ मिला है। फैक्ट्री फार्मिंग पर्यावरण के लिए भी हानिकारक भारत में वर्तमान में लगभग 80 प्रतिशत अंडे फैक्ट्री फार्मिंग से आते हैं, जहां मुर्गियों को छोटे पिंजरों में रखा जाता है, जबकि केवल 20 प्रतिशत उत्पादन ही पिंजरा-मुक्त प्रणाली से होता है। फैक्ट्री फार्मिंग न केवल पशुओं के लिए क्रूर है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है। इससे वायु, जल और मिट्टी प्रदूषण के साथ-साथ ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और वनों की कटाई जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। पिंजरा-मुक्त प्रणाली पूरी तरह क्रूरता-मुक्त नहीं है, लेकिन यह पशुओं की स्थिति सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल भारत को उस वैश्विक आंदोलन का हिस्सा बना रही है, जहां कंपनियां पशु कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता दे रही हैं।