भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ अब लॉन्च के लिए तैयार है। स्काईरूट एयरोस्पेस ने इसकी पहली टेस्ट फ्लाइट के लिए 12 जुलाई से 4 अगस्त तक की लॉन्च विंडो घोषित की है। यह भारत की प्राइवेट स्पेस क्षमता की पहली बड़ी परीक्षा है। इसकी सफलता से छोटे उपग्रहों को जरूरत के मुताबिक और ज्यादा तेजी से अंतरिक्ष में भेजा जा सकेगा। इससे खेती, संचार, नेविगेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसी सेवाएं और मजबूत होंगी। अगर विक्रम-1 सफल रहता है तो भारत निजी क्षेत्र के दम पर ऑर्बिट तक पहुंचने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा। विक्रम-1 की लॉन्चिंग से पहले स्काईरूट एयरोस्पेस के फाउंडर पवन कुमार चंदाना ने भास्कर से बातचीत की। उन्हीं के शब्दों में पढ़ें पूरा इंटरव्यू… लेकिन उससे पहले देखें विक्रम-1 की झलक… स्पेस से पूरी हो रहीं रोजमर्रा की जरूरतें अगर आप फोन पर मैप्स चलाते हैं या डिजिटल पेमेंट करते हैं, तो उसके पीछे भी अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट काम कर रहे होते हैं। मैप्स आपकी सटीक लोकेशन सैटेलाइट से मिले नेविगेशन सिग्नल के आधार पर बताते हैं, जबकि यूपीआई जैसी सेवाएं इंटरनेट और संचार नेटवर्क पर चलती हैं, जिन्हें दूरदराज के इलाकों में सैटेलाइट भी मजबूती देते हैं। सैटेलाइट बढ़ेंगे तो हर क्षेत्र में सुविधाएं भी बढ़ेंगी अंतरिक्ष में बढ़ते सैटेलाइट नेटवर्क के साथ लॉन्च की मांग भी कई गुना बढ़ेगी। अभी भारत में ज्यादातर सैटेलाइट इसरो लॉन्च करता है। लेकिन आने वाले वर्षों में सैटेलाइट की संख्या तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में इसरो चंद्रयान, गगनयान और अंतरिक्ष स्टेशन जैसे बड़े मिशनों पर ध्यान देगा। स्काईरूट जैसी निजी कंपनियां छोटे सैटेलाइट को बार-बार और जरूरत के मुताबिक कक्षा में पहुंचाने का काम करेंगी। इससे मौसम, इंटरनेट, खेती, आपदा प्रबंधन और संचार जैसी सेवाएं पहले से ज्यादा तेज और सटीक हो सकेंगी। स्पेसएक्स से अलग, ‘कैब मॉडल’ पर स्काईरूट स्काईरूट की तुलना स्पेसएक्स से होती है, लेकिन दोनों का मॉडल अलग है। इसे ट्रेन और कैब से समझ सकते हैं। ट्रेन तय समय पर तय स्टेशन तक ही ले जाती है। लेकिन अगर आपको किसी खास समय पर किसी खास जगह पहुंचना हो, तो कैब बेहतर विकल्प है। स्पेस में भी यही फर्क है। स्पेसएक्स का रॉकेट ट्रेन की तरह तय कक्षा में सैटेलाइट छोड़ता है, जबकि विक्रम-1 ‘कैब’ की तरह जरूरत के मुताबिक मनचाही कक्षा में सैटेलाइट पहुंचा सकेगा। अब ऐसे ‘ऑन-डिमांड लॉन्च’ की मांग तेजी से बढ़ेगी। बदलती स्पेस टेक्नोलॉजी का नया चेहरा हैं छोटे सैटेलाइट स्काईरूट और फाउंडर से जुड़ी खास बातें… स्काईरूट एयरोस्पेस प्राइवेट स्पेस कंपनी है, जो छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए रॉकेट बना रही है। यह भारत की पहली निजी कंपनी है जिसने सफलतापूर्वक एक रॉकेट अंतरिक्ष में लॉन्च किया। स्काईरूट की स्थापना 2018 में हैदराबाद में हुई थी। फाउंडर्स पवन कुमार चंदाना और नगा भारत डाका हैं। दोनों पहले ISRO में वैज्ञानिक और इंजीनियर रह चुके हैं। 18 नवंबर 2022 को स्काईरूट ने विक्रम-S का सफल प्रक्षेपण किया। मिशन का नाम 'प्रारंभ' था। यह भारत के प्राइवेट स्पेस जोन के इतिहास का पहला सफल रॉकेट लॉन्च था। कंपनी विक्रम-1 के अलावा विक्रम-2 और विक्रम-3 ऑर्बिटल बना रही है। इनका नाम विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। भास्कर नॉलेज… दुनिया में प्राइवेट स्पेस क्षेत्र की शुरुआत को नई ऊंचाई स्पेस X जैसी कंपनियों ने दी। भारत में 2020 के बाद अंतरिक्ष क्षेत्र निजी कंपनियों के लिए खोला गया, जिसके बाद स्काईरूट, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सेल और बेलास्ट्रिक्स एयरोस्पेस जैसे स्टार्टअप तेजी से उभरे। इससे भारत ग्लोबल न्यू स्पेस इकोनॉमी में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।