जैन समाज में पारिवारिक विवाद को समाज स्तर पर निस्तारित करने के लिए काउंसलिंग की जाएगी। इसके लिए भरतपुर में मध्यस्ता केंद्र बनाया जाएगा। जैन एडवोकेट जैन तीर्थों के संरक्षण से जुड़े मामलों में कानूनी लड़ाई को मजबूती देने और जैन समाज को कानूनी समस्याओं में प्रभावी सहयोग देंगे। यह निर्णय केशवरायपाटन में जैन एडवोकेट्स कॉन्फ्रेंस में लिया गया। यूनिवर्सल जैन लॉयर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि अभिषेक जैन ने बताया कि जैन एडवोकेट्स, संगठनों की जैन समाज के प्रति भूमिका और सहयोग पर चर्चा की गई। पारिवारिक विवादों को मुकदमे बाजी तक पहुंचने से पहले आपसी संवाद, समझौते के माध्यम से सुलझाने के लिए काउंसलिंग कमेटी के गठन की पहल की जाएगी। यह कमेटी विवादित पक्षों की काउंसलिंग कर समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास करेगी, ताकि परिवारों को अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचाया जा सके। मध्यस्थता केंद्र बनाए जाएंगे, जिससे पारिवारिक विवाद सुलझाने में मदद मिल सके। जैन समाज को कानूनी मामलों में प्रभावी पैरवी के लिए सशक्त समन्वय समिति बनाई जाएगी। अधिवक्ता अभिषेक जैन ने बताया कि समाज के अधिवक्ता कानूनी पैरवी के लिए तैयार रहते हैं। इसमें तीर्थ, मंदिर या धार्मिक परंपराओं से जुड़े मामलों में शास्त्रों के जानकार विद्वानों, आवश्यक दस्तावेजों व आर्थिक संसाधनों के रूप में समाज का संगठित सहयोग मिलेगा। समाज में पारिवारिक विवादों पर जताई चिंता सम्मेलन में समाज में बढ़ते पारिवारिक विवादों पर चिंता जताई गई। समाज के कानूनी हितों की रक्षा व पारिवारिक विवादों के समाधान के लिए देशभर में मध्यस्थता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। भरतपुर में भी शीघ्र केंद्र स्थापित होगा, जिसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश करेंगे और इसमें 2 पूर्व न्यायाधीश व 3 वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल होंगे। सम्मेलन में मुख्य अतिथि एमपी हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अभय गोहिल ने कहा कि कानूनी मामलों में केवल अधिवक्ताओं पर जिम्मेदारी डालना पर्याप्त नहीं है। विषय की जानकारी जुटाने, दस्तावेज उपलब्ध कराने, गवाहों की व्यवस्था करने और अदालती प्रक्रिया की निगरानी के लिए समाज के लोगों को भी जिम्मेदारी उठानी होगी, तभी पैरवी प्रभावी ढंग से हो सकेगी। अधिवेशन में वक्ताओं ने जैन समाज के धार्मिक स्थलों, परंपराओं, साधु-संतों और सांस्कृतिक विरासत के कानूनी संरक्षण के लिए समाज व अधिवक्ताओं के बीच समन्वय पर बल दिया।