कोटा में रियासतकालीन परंपरा के अनुसार बुधवार को आषाढ़ी पूर्णिमा पर गढ़पैलेस स्थित 100 फीट ऊंचे जंतर की बुर्ज पर धर्म ध्वजा लगाकर वायु धारणा परीक्षण किया गया। इससे हाड़ौती में मानसून में अच्छी बारिश के संकेत मिले। मुहर्त के अनुसार- शाम को दिशा सूचक यंत्र में धर्म ध्वजा लगाकर विधि-विधान से वायु धारणा पूजन किया। पूजन के बाद शुभ मुहूर्त में शाम 7:13 से 7:15 के बीच हवा के प्रभाव की दिशा को देखा गया। फसलों को कीटों से नुकसान का दिखा योग शुभ मुहूर्त के समय हवा का प्रभाव उत्तर से पश्चिम (वायव्य कोण) और पूर्व से दक्षिण (आग्नेय कोण) रहा। यह हाड़ौती क्षेत्र में फसलों को कीटों (टिड्डी आदि) से नुकसान का योग दर्शाता है। कुछ समय हवा का उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर चलना अच्छी बारिश का संकेत भी देता है। मानसून के अच्छा रहने का संकेत देता है। हाड़ौती क्षेत्र में औसत से अच्छी बारिश रहने की संभावना है। जो फसलों के लिए लाभदायक रहेगी। परंतु कुछ-कुछ क्षेत्रों में आवश्यकता से अधिक बारिश होने के कारण और कुछ क्षेत्रों में कीटों से फसलों को हानि पहुंचेगी। उससे क्षेत्र के किसानों को नुकसान होने की संभावना बनेगी। मंदिर में धान्य परीक्षण का किया वायु धारणा पूजन के बाद गढ़ पैलेस, रियासत कालीन श्रीबृजनाथ जी महाराज मंदिर में धान्य परीक्षण का कार्य किया गया। इसमें शयन आरती के बाद हाड़ौती क्षेत्र में होने वाले विभिन्न धानयों की निश्चित मात्रा अलग-अलग पत्रों में तोड़कर सफेद कपड़े से ढंककर श्रीरघुनाथ जी महाराज के सामने रखी गई। सुबह मंगला आरती के बाद इनका वजन किया जाएगा। इसमें जिस धान के वजन में बढ़ोतरी होगी, उसकी अच्छी पैदावार होने का अनुमान रहेगा। इसमें कमी देखी जाएगी, उसकी फसल कम रहने का अनुमान रहेगा। यह एक रियासत कालीन परंपरा है। इसका राज परिवार कोटा द्वारा निर्वहन किया जा रहा है। वायु धारणा पूजन में आचार्य पंडित आशुतोष दाधीच, पंडित कुंज बिहारी गौतम, पंडित प्रेम नारायण शास्त्री, पंडित विद्याधर शास्त्री, पंडित पुरुषोत्तम शास्त्री, पंडित प्रहलाद शास्त्री, पंडित अवधेश, पंडित राधेश्याम मौजूद रहे।