जन्म के 6 दिन बाद मां की मौत, 6 साल की उम्र में सैनिक पिता का बीमारी से निधन। करीब 20 साल बाद शादी हुई तो सेना में पिता के साथी जवान पहुंचे और रस्में निभाई। जयपुर के खेजरोली में ये दृश्य देख समारोह में आए मेहमानों की आंखें नम सी हो गई। जवानों ने कन्यादान के रूप में 1.31 लाख रुपए, कपड़े और घरेलू सामान भी दिया। सेना के 25 जवान पहुंचे दुल्हन के चाचा जयपाल सामोता ने बताया- सोमवार को भतीजी सीमा सामोता (26) की शादी गोविंदगढ़ के ही सरगोठ के नागल निवासी ताराचंद जाट के साथ हुई। शादी में 3 जाट, 4 जाट और 24 जाट रेजिमेंट के 25 जवान शामिल हुए। जवानों ने चारों कोनों से दुल्हन को चूंदड़ी की छाया में स्टेज तक पहुंचाया और शादी की रस्में निभाई। 2006 में बीमारी से हुआ था पिता का निधन जयपाल ने बताया- सीमा के जन्म के 6 दिन बाद ही उसकी मां अनिता देवी का निधन हो गया था। पिता मंगलचंद सामोता भारतीय सेना में थे। मंगलचंद 1997 में भर्ती हुए थे। 8 साल की सर्विस के बाद उन्हें कैंसर और पीलिया हुआ और 2006 में उनका भी निधन हो गया। अंतिम समय में मंगलचंद तीन जाट रेजिमेंट के साथ श्रीनगर में तैनात थे। माता-पिता के निधन के बाद सीमा की परवरिश चाचा जयपाल और मौसी (चाची) इंद्रा देवी पत्नी प्रभात ने की। परिवार में चाचा प्रभात सामोता, श्रवण सामोता और सीताराम सामोता सहित अन्य परिजनों ने भी सीमा को सहयोग दिया। सीमा ने ग्रेजुएशन की और फोर्थ ग्रेड परीक्षा पास कर ली। हालांकि, जॉइनिंग होना बाकी है। चाचा जयपाल भी भारतीय सेना में है और 24 जाट रेजिमेंट में सूबेदार के पद पर अरूणाचल प्रदेश में तैनात हैं। स्टेज तक पहुंचाया, रस्में निभाई पिता के निधन के 20 साल बाद जब सीमा की शादी तय हुई तो उनके पिता के साथी सैनिक भी शादी में शामिल होने खेजरोली के बाघवाली ढाणी पहुंचे। चारों कोनों से चूंदड़ी पकड़ी और बेटी को स्टेज तक पहुंचाया। विवाह समारोह के दौरान सेना के जवानों ने कई रस्में निभाई। पटाखों और डीजे की धुन के बीच जहां खुशी का माहौल था। वहीं, जवानों की उपस्थिति ने इस शादी को खास बना दिया। जवानों ने कहा कि आगे भी परिवार के कार्यक्रमों में शामिल होने आते रहेंगे।