जयपुर पुलिस ने साइबर फ्रॉड (हवाला, फेक बैंक अकाउंट्स और क्रिप्टो करेंसी) के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का शुक्रवार दोपहर भंडाफोड किया। वैशाली नगर थाना पुलिस ने सिंडिकेट के मास्टर माइंड को अरेस्ट कर बड़ी संख्या में साइबर फ्रॉड में यूज मोबाइल, डेबिट कार्ड किट व गूगल पे स्केनर रोल बरामद किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि वह 20 दिन पहले नेटवर्क विस्तार के लिए जयपुर आया था। पिछले दो साल में वह अपने साथियों के साथ मिलकर 24 करोड़ रुपए ठग कर 'व्हाइट मनी' में चेंज कर चुका है। पुलिस फिलहाल गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है। डीसीपी (वेस्ट) प्रशांत किरण ने बताया- 27 अक्टूबर को मुखबिर से सूचना मिली वैशाली नगर की नेमी सागर कॉलोनी स्थित अपार्टमेंट के फ्लैट में विकास ढाका नाम का लड़का रह रहा है। वह अपने साथियों के साथ मिलकर यूएसडीटी और क्रिप्टो करेंसी को अवैध रुप से लेकर साइबर फ्रॉड करने का बड़ा गिरोह चला रहा है। एडि.डीसीपी राजेश गुप्ता व प्रो.आईपीएस अदिती उपाध्याय के सुपरविजन में टीम बनाई गई। वैशाली नगर थानाधिकारी अरविन्द सिंह और डीएसटी प्रभारी गणेश सैनी के नेतृत्व में टीम ने छापेमारी की। पुलिस ने फ्लैट में दबिश देकर संदिग्ध विकास ढाका पुत्र राजेन्द्र ढाका निवासी बासनी बराला सीकर को धर-दबोचा। पुलिस पूछताछ में हवाला, फेक बैंक अकाउंट्स और क्रिप्टो करेंसी के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का मास्टर माइंड होना पाया गया। पुलिस ने आरोपी विकास ढाका को साइबर क्राइम के एक्ट में अरेस्ट किया। जिसके कब्जे से 9 मोबाइल, 8 फिनो पेमेंट डेबिट कार्ड किट व गूगल पे स्केनर रोल बरामद किए। पुलिस प्रारम्भिक जांच में सामने आया कि आरोपी विकास मूलत: राजस्थान के विभिन्न जिलों में अवैध नेटवर्क चला रहा था। वह करीब 20 दिन पहले ही जयपुर में अपने सिंडिकेट को फैलाने और यहां से नए म्यूल (फेक) अकाउंट्स व मर्चेंट नेटवर्क को संचालित करने के इरादे से आया था। वह जैसलमेर और सीकर के आस-पास इलाकों में संचालित रिसॉर्ट्स और रेस्टोरेंट में काम करने वाले गरीब व सीधे-साधे मजदूरों को पैसों का लालच देकर उनके पहचान पत्रों (KYC) का दुरुपयोग करता था। इन डॉक्यूमेंट के आधार पर वह प्राइवेट व पेमेंट्स बैंकों में चालू व सेविंग अकाउंट्स खुलवाता था। साथ ही एयरटेल पेमेंट्स बैंक के मर्चेंट क्यूआर कोड तैयार करवाता था। तैयार किए गए ये बैंक अकाउंट्स और मर्चेंट क्यूआर कोड अवैध ऑनलाइन गैबलिंग प्लेटफॉर्मस और देशभर के साइबर क्रिमिनलर्स को भारी कमीशन पर बेचे जाते थे। साइबर फ्रॉड, ठगी व सट्‌टे की रकम सीधे इनमें जमा हो सके। इस अवैध रकम को आरोपी विकास तुरंत क्रिप्टो करेंसी में बदल लेता था। इसके बाद दुबई स्थित हवाला और क्रिप्टो नेटवर्क के जरिए इस रकम को लिक्विडेट कर 'व्हाइट मनी' के चेंज कर वापस भारतीय बाजार में खपाया जाता था। पुलिस की तकनीकी व साइबर सेल टीम जब्त किए 9 मोबाइल की फॉरेंसिक जांच कर रही है। इन मोबाइलों में सक्रिय अन्य अज्ञात क्रिप्टो वॉलेट्स, डिजिटल कीज, टेलीग्राम सिंडिकेट चैट्स और एक्टिव बैंक अकाउंट्स को खंगालने में जुटी है। पिछले 2 सालों में आरोपी व उसके साथियों ने करीब 24 करोड़ रुपए की लेन-देन यूएसडीटी का लेन-देन किया जाना सामने आया है। इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य एजेंटों, हवाला कारोबारियों और विदेशी कॉन्टैक्टों के बारे भी जानकारी जुटाई जा रही है।