एक साल पहले 2 जुलाई 2025 को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने जयपुर-दौसा-बांदीकुई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे शुरू किया था। करीब 67 किलोमीटर लंबा ये एक्सप्रेसवे ट्रैफिक को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे में मर्ज करता है। अथॉरिटी ने जयपुर से शुरू होने वाले इस सफर को लेकर कई दावे किए थे… इस रूट से जयपुर से दिल्ली पहुंचने में महज 3 घंटे लगेंगे। करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से कारें दौड़ेंगी। न तो कहीं जाम लगेगा और न ही सड़क पर ब्रेकर या गड्ढे मिलेंगे। अब एक साल बाद इस एक्सप्रेस-वे की ग्राउंड रिएलिटी क्या है? क्या वाकई जयपुर से दिल्ली का सफर आसान हो गया है? ट्रैफिक जाम, लंबी टोल लाइनें, सड़क पर घूमते जानवरों और ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहनों का खतरा खत्म हो गया है? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए भास्कर ने जयपुर से दिल्ली तक की जर्नी की। आप भी चलिए हमारे साथ इस सफर पर... रिपेयरिंग में परेशानी, कई जगह सड़क उबड़-खाबड़ भास्कर टीम सुबह 7:15 बजे जयपुर में जयपुर-दौसा-बांदीकुई ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के स्टार्टिंग पॉइंट बगराना गांव के इंटरचेंज पर पहुंची। इस टोल प्लाजा पर हमारी कार की डिजिटली एंट्री हुई, कोई टोल नहीं कटा। इसके बाद हम दिल्ली के सफर पर निकल गए। एक्सप्रेस-वे पर साल भर में ही सड़क कई जगहों पर उखड़ गई हैं। हालांकि इन्हें NHAI ने रिपेयर किया है, पर रिपेयरिंग का काम ठीक से नहीं किए जाने से कई जगहों पर सड़क उबड़-खाबड़ हो गई है। यही वजह रही कि हम एक्सप्रेस वे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड पर नहीं चल पा रहे थे। हमने हमारे ड्राइवर बलराम से पूछा तो उन्होंने बताया कि सड़क पर इनकी वजह से टर्बुलेन्स होता है। स्पीड में कार का संतुलन बिगाड़ सकता है। हालांकि इसके बाद भी एक्सप्रेस-वे पर हमारी कार 90 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ रही थी। एक्सप्रेस-वे के किनारे खुल गए हैं ढाबे वक्त हो रहा था सुबह 7 बजकर 45 मिनट और हमने जयपुर से बांदीकुई तक एक्सप्रेस-वे का 67 किलोमीटर तक सफर पूरा कर लिया था। आगे सफर में करीब 20-25 किलोमीटर तक सड़क में कई जगहों पर गाड़ी जंप कर रही थी। झटके भी लग रहे थे। रिपेयरिंग वर्क के कारण स्पीड को धीमा करना पड़ रहा था। हालांकि इसके बावजूद अब तक का सफर बिना ट्रैफिक जाम वाला था। अच्छी हाइट पर बने एक्सप्रेस-वे की बनावट ऐसी है कि एक्सप्रेस-वे के दोनों और खेतों के नजारे और अरावली की पहाड़ियों का व्यू शानदार अनुभव देता है। हालांकि एक्सप्रेस-वे से लगते खेतों से कई जगहों पर हाईवे की तरफ एक्सेस खोल ली गई है। इसके चलते वहां छोटे-छोटे ढाबे और ठेले लग गए हैं। इनके किनारों पर कई ट्रक और कार ड्राइवर अपनी गाड़ियों को खड़ा कर देते हैं, जबकि एक्सप्रेस-वे पर गाड़ी रोकना सख्त मना है। इसके लिए बांदीकुई से आगे हर 25 किलोमीटर के बाद रेस्ट एरिया बनाए गए हैं। इन रेस्ट एरिया में ट्रॉमा सेंटर, ई-व्हीकल चार्जिंग पाइंट, पेट्रोल पंप, सर्विस स्टेशन और रेस्टोरेंट व फूड प्लाजा खुले हुए हैं, जहां बड़ी तादाद में गाड़ियां रुक रही थी। दिल्ली से 60-65 किलोमीटर पहले बढ़ गया ट्रैफिक अब हमारी कार 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से लेकर 118 और कई बार 120 किलोमीटर की स्पीड पकड़ रही थी। करीब 227 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद एक्सप्रेस वे का हिलालपुर एग्जिट फ्री प्लाजा आया। यहां अब तक तय की गई डिस्टेंस के हिसाब से अपने आप कैलकुलेट होकर फास्टैग से 470 रुपए का टोल कटा। टाइम हो रहा था, 9 बजकर 33 मिनट। यानी 227 किमी की दूरी महज 2 घंटे 18 मिनट में पूरी कर ली थी। दिल्ली अभी 60-65 किलोमीटर दूर थी। यहां से आगे बढ़े तो स्पीड कम करनी पड़ी, क्योंकि ऑफिस टाइम होने के चलते दिल्ली और गुरुग्राम की तरफ जाने वालों की वजह से ट्रैफिक बढ़ गया था। 32 किलोमीटर चलने के बाद सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर घमोरज सोहना रोड टोल प्लाजा पहुंचे। फास्टैग के मार्फ़त यहां 130 रुपए टोल काटा गया। अब हम गुरुग्राम के रास्ते दिल्ली की तरफ जा रहे थे। यहां ट्रैफिक का दबाव और बढ़ गया। कई बार कार की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे से भी कम करनी पड़ी। सुबह 10 बजकर 25 मिनट पर हमने बिजवासन टोल प्लाजा से दिल्ली में एंट्री ले ली। यहां भी फास्टैग से 79 रुपए का टोल काटा गया। ऐसे में हमने जयपुर के बगराना से दिल्ली में बिजवासन टोल प्लाजा से एंट्री तक का 285 किमी का ये पूरा सफर 3 घंटे 10 मिनट में पूरा कर लिया। कुछ जगहों को छोड़ दे तो अधिकांश रोड क्वालिटी बेहतर तो नहीं, लेकिन अच्छी है। इस सफर के दौरान हमें पूरे एक्सप्रेस-वे पर कहीं भी ब्रेकर नजर नहीं आए। 285 किमी में 227 किमी या 80% सफर में ब्रेक नहीं लगाने पड़े। जांच में 4 दावे फेल साबित हुए 1. कुछ जगहों पर सीसीटीवी बंद या खराब : हाईवे पर हर 500 मीटर की दूरी पर सीसीटीवी लगाए गए हैं। दावा था कि इससे आप कैमरों की नजर में रहेंगे। गाड़ी के आने-जाने का पूरा रिकॉर्ड मौजूद रहेगा। कुछ जगहों पर ये सीसीटीवी कैमरे खराब या बंद पड़े मिले। हालांकि इन्हें तुरंत रिपेयर भी किया जा रहा था। 2. फोन बूथ से सामान चोरी : एक्सप्रेस-वे पर इमरजेंसी हेल्प के लिए फोन बूथ भी बनाए गए थे। इनमें से अधिकांश तो खराब पड़े हैं और कुछ के सामान चोरी हो गए हैं। 3. दोनों ओर बैरिकेडिंग का दावा फेल : हाईवे के दोनों ओर बेरिकेडिंग का भी दावा था ताकि आवारा जानवर सड़क पर न आ जाएं। हालांकि हमारी पड़ताल में ये दावा फेल साबित हुआ। एक्सप्रेस वे पर कुछ जगहों पर हमें एक्सीडेंट के बाद जानवरों के शव पड़े दिखे। वहीं इन बेरिकेडिंग को तोड़कर खेतों में चलते ढाबे और आवजाही के लिए बनाए गए रास्ते नजर आए। 4. दौड़ रहे दुपहिया और जुगाड़ : एक्सप्रेस-वे पर दुपहिया वाहन के साथ ट्रैक्टर, ऑटो और जुगाड़ के चलने की अनुमति नहीं हैं। बावजूद इसके ये गाड़ियां एक्सप्रेस-वे पर बड़ी संख्या में नजर आ जाती हैं। कैसा है इस एक्सप्रेस-वे का एक्सपीरियंस फर्स्टक्लास है ये रूट: ब्यावर के रहने वाले प्रसून शुक्ला ने बताया कि वो हरिद्वार से ब्यावर जा रहे हैं। मेरठ के आगे से वो अपनी कार से इस एक्सप्रेस वे पर चढ़े थे। महज ढाई घंटे में जयपुर पहुंच गए हैं। ये एक्सप्रेस वे की सड़क फर्स्टक्लास हैं। न ट्रैफिक, न कोई दूसरी रुकावट: अहमदाबाद से नैनीताल घूमने गए कुछ युवाओं का ग्रुप भी हमें मिला। कार ड्राइव कर रहे पार्थ गोयल ने बताया- एक्सप्रेस वे शानदार हैं। कहीं कोई ट्रैफिक नहीं है। उन्होंने गाजियाबाद से इस एक्सप्रेस-वे पर एंट्री ली थी। दो बार बीच में रुके थे, इसके बावजूद 5 घंटे में जयपुर पहुंच गए। …. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… राजस्थान में बस-ट्रेलर भिड़े, 8 मौतें:DNA टेस्ट से पहचान होगी, आग में फंसे थे 40 पैसेंजर्स; दावा- डिक्की में सिगरेट बॉक्स भरे थे राजस्थान के दौसा जिले में मंगलवार देर रात बस-ट्रेलर की भिड़ंत हो गई। एक्सीडेंट में 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इनमें 6 लोगों की मौत आग में झुलसने से और 2 की सिर पर चोट लगने के कारण हुई है। पूरी खबर पढ़िए…