जयपुर में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा- भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल इंसानों की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। 29वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन ई-गवर्नेंस के दूसरे दिन गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह कहा। इससे पहले 'AI इन पुलिसिंग' सेशन में पुलिसिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल, डेटा सिक्योरिटी और नई टेक्नोलॉजी की चुनौतियों पर चर्चा हुई। एक्सपर्ट्स ने बताया कि AI से इन्वेस्टिगेशन, लॉ एंड ऑर्डर, क्राइम एनालिसिस और पब्लिक सर्विस बेहतर हो सकती है, लेकिन संवेदनशील डेटा की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी। राजस्थान कैडर के 2007 बैच के IPS अधिकारी और डीआईजी (BPRD) डॉ. अमनदीप सिंह कपूर ने कहा कि पुलिस विभाग ने AI को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अपनाना शुरू कर दिया है। हालांकि, इसका इस्तेमाल पूरी तरह सुरक्षित और जवाबदेह होना चाहिए, क्योंकि पुलिस के पास सबसे संवेदनशील डेटा होता है। क्रिमिनल डेटा प्राइवेट कंपनियों के पास जाना खतरनाक डॉ. कपूर ने कहा कि आज पुलिस के पास ऐसा कोई अपना AI प्लेटफॉर्म नहीं है, इसलिए कई बार बाहरी कंपनियों के टूल्स का इस्तेमाल करना पड़ता है। उन्होंने कहा, "हम पुलिस का डेटा, क्रिमिनल रिकॉर्ड और इंटेलिजेंस से जुड़ी जानकारी प्राइवेट कंपनियों के साथ शेयर कर रहे हैं। यह बहुत बड़ा खतरा है। इस डेटा पर प्राइवेसी के कानून लागू होते हैं और इसका लीक होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी जोखिम बन सकता है।" पुलिस को अपने AI टूल्स खुद बनाने होंगे उन्होंने कहा कि बाजार में उपलब्ध AI टूल्स डेटा कहां से लेते हैं, इसकी पूरी जानकारी किसी के पास नहीं होती। डेटा प्रोटेक्शन के नियम पूरी तरह लागू होने के बाद ऐसे कई टूल्स बंद भी हो सकते हैं। इसलिए पुलिस को अपनी जरूरत के हिसाब से इन-हाउस AI टूल्स तैयार करने होंगे और कंसल्टेंट्स पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए। डेटा सिक्योरिटी भी पुलिस की जिम्मेदारी होगी डॉ. कपूर ने कहा कि आने वाले समय में पुलिस की जिम्मेदारी केवल लोगों की जान-माल की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगी। अगर किसी थाने से क्रिमिनल डेटा लीक होता है तो उसकी जवाबदेही भी पुलिस की होगी। इसलिए डेटा सिक्योरिटी को भी पुलिसिंग का अहम हिस्सा बनाना होगा। दिल्ली पुलिस का 'ई-चिट्ठा' बना उदाहरण उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस में 'ई-चिट्ठा' सॉफ्टवेयर के जरिए पुलिसकर्मियों की ड्यूटी ऑटोमैटिक तरीके से अलॉट होती है। इससे सिस्टम ज्यादा पारदर्शी, तेज और प्रभावी बना है। AI कभी पुलिस की जगह नहीं ले सकता डॉ. कपूर ने कहा कि AI से सीए, वकील और हेल्थ सेक्टर जैसे कई प्रोफेशन प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन पुलिसिंग में ऐसा संभव नहीं है। थाना और पुलिसकर्मी हमेशा पुलिसिंग की सबसे अहम यूनिट रहेंगे। AI केवल उनकी एफिशिएंसी बढ़ाने का काम करेगा, उनकी जगह नहीं ले सकता। ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी की समझ जरूरी उन्होंने कहा कि AI का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए पुलिसकर्मियों को नई टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग देना जरूरी है। भविष्य की स्मार्ट पुलिसिंग के लिए टेक्नोलॉजी की समझ और डेटा सिक्योरिटी दोनों पर बराबर फोकस करना होगा। एआई से आसान, पारदर्शी और जवाबदेह बनेगा शासन केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा- सरकार का लक्ष्य तकनीक के जरिए शासन को अधिक सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। प्रधानमंत्री के "अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार" के विजन के तहत पिछले 10 साल में शुरू की गई हर डिजिटल पहल का उद्देश्य लोगों को बेहतर और तेज सेवाएं उपलब्ध कराना रहा है। तकनीक ऐसी होनी चाहिए, जो प्रक्रियाओं को आसान बनाए, अनावश्यक औपचारिकताएं खत्म करे और लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा मजबूत करे। डिजिटल गवर्नेंस अब नए दौर में पहुंचा डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा- जयपुर में दो दिनों तक चली नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन ई-गवर्नेंस ने दिखाया कि भारत की डिजिटल गवर्नेंस यात्रा अब सिर्फ सेवाओं को ऑनलाइन करने तक सीमित नहीं है। अब देश एआई, डेटा आधारित निर्णय, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित डिजिटल सिस्टम के जरिए प्रशासन का नया मॉडल तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सुधार तभी सफल माने जाएंगे, जब उनका सीधा लाभ आम लोगों को मिले। इसी दिशा में सीपीग्राम्स (केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली) जैसी व्यवस्था ने शिकायतों के निस्तारण का समय कम किया है और देशभर में लोगों की पहुंच को आसान बनाया है। दो दिवसीय सम्मेलन में 80 से अधिक केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों, 28 राज्यों तथा 8 केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी प्रदर्शनों और अनुभव साझा करने के माध्यम से डिजिटल गवर्नेंस के सफल मॉडलों पर भी चर्चा की जा रही है।