चूरू का भरतराज जयपुर में राजस्थान के सबसे बड़े हॉस्पिटल सवाई मानसिंह (SMS) में मुफ्त दवा काउंटर पर लगी कतार में लगा है। करीब 2 घंटे बाद नंबर आया तो जवाब मिला- डॉक्टर की लिखी 5 में से 3 दवाएं उपलब्ध नहीं है...एक काम करो....रूम नंबर-11 पर ट्राई करो। एक काउंटर से दूसरे, फिर तीसरे काउंटर तक चक्कर काटने के बाद भी दवा नहीं मिली। आखिर में उससे कहा गया- पर्चा दे जाओ 3 से 4 दिन बाद आकर ले जाना। यह कहानी सिर्फ भरतराज की नहीं है। हर दिन सैकड़ों मरीज इसी परेशानी से गुजर रहे हैं। पड़ताल में सामने आया कि एसएमएस हॉस्पिटल में सामान्य बुखार से लेकर कैंसर, हार्ट, डायबिटीज, आंखों के रोग और सर्जरी में जान बचाने वाली 206 दवाइयां और इंजेक्शन नहीं मिल रहे। मरीजों को आधी या कुछ दवाइयां लेकर लौटना पड़ रहा है या फिर बाहर से खरीद रहे हैं। पहले डॉक्टर की लंबी कतार और बाद में मुफ्त दवा के लिए काउंटरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जो बाहर से आते हैं, उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है-बार-बार जयपुर आएं या जेब से दवा खरीदें? केस नंबर 1 : 5 घंटे चक्कर कटवाने के बाद बोला- 3-4 दिन बाद आना दूदू कस्बे से जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल आए किशनलाल को बार-बार चक्कर आते थे। कुछ दिन पहले डॉक्टर्स से इलाज लिया। दोबारा दिखाने आए तो कई घंटों में ओपीडी में नंबर आया। डॉक्टर ने 5 दवाएं लिख दी। मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के काउंटर पर लाइन में लगे तो काफी देर बाद नंबर आया। लेकिन वहां 2 दवाइयां नहीं मिली। यहां से उन्हें काउंटर नबर 10-11 पर भेजा गया। यहां पर भी दवाएं नहीं मिली तो किशनलाल फिर से डॉक्टर के पास पहुंचे। डॉक्टर ने दवा काउंटर से पर्ची पर नॉट अवेलेबल का ठप्पा लगवाकर लाने को कहा। किशनलाल उस काउंटर पर पहुंचे तो काउंटर संचालक ने दवा नॉट अवेलेबल लिखने से इनकार कर दिया गया। किशनलाल ने भास्कर को बताया कि 3-4 चक्कर काटने के बाद भी दवा नहीं मिली। लास्ट में कहा गया- पर्ची की फोटोकॉपी दे जाओ। लोकल परचेज के बाद 3-4 में दवाएं मिल जाएंगी। केस नंबर-2 : 5 मरीजों में एक को भी नहीं मिली पूरी दवाई जयपुर के रामचरण को स्किन एलर्जी की समस्या है। डॉक्टर ने देखने के बाद पर्ची पर 3 दवाएं लिख दी। लेकिन ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन काउंटर पर 2 दवाएं नहीं मिली तो 10-11 नंबर काउंटर से दवा लेने के लिए भेज दिया गया। लेकिन इस काउंटर पर दवाएं नहीं मिली। अब रामचरण को समझ नहीं आ रहा है कि अब कहां जाना है। इसी तरह चूरू के भरतराज को अर्थराइटिस की 3, पेट दर्द की समस्या लेकर आई जयपुर की राधा को 1 तो वहीं, अलवर से आए पेट-सीने में दर्द का इलाज कराने आए विक्रम को भी कुछ दवाइयां नोट अवेलेबल बताई गई। ज्यादातर मरीजों ने बताया कि सबसे बड़े हॉस्पिटल में कम से कम सभी दवाइयां मिल जाएंगी, अब यहीं सप्लाई नहीं है तो वे कहां जाएं? भास्कर पड़ताल : 200 से ज्यादा दवाएं नॉट अवेलेबल पड़ताल में सामने आया कि एक जुलाई से एसएमएस हॉस्पिटल में 206 दवाएं नॉट अवेलेबल हैं। इनमें हार्ट डिजीज, डायबिटीज, इन्फेक्शन, दर्द-सूजन, नेत्ररोग समेत कई कीमोथेरेपी दवाएं भी शामिल हैं। जयपुर के दूसरे हॉस्पिटलों में भी यही हाल ऐसा नहीं है कि सिर्फ एसएमएस हॉस्पिटल में ही इस प्रकार के हालात है। एसएमएस के अलावा अन्य सरकारी हॉस्पिटलों में भी आए दिन इस प्रकार के हाल होते हैं। राजधानी के शास्त्री नगर स्थित कांवटिया हॉस्पिटल में भी फिलहाल 100 से अधिक दवाएं उपलब्ध नहीं है। स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में भी दवाएं उपलब्ध नहीं होने पर दूसरे विकल्प दिए जा रहे हैं। सभी दवाएं उपलब्ध कराने की होती है कोशिश : हॉस्पिटल प्रशासन एसएमएस हॉस्पिटल में उपाधीक्षक डॉ. जगदीश मोदी ने बताया कि कुछ दवाएं आरएमएससीएल से अनुपलब्ध हैं। लेकिन उन दवाओं के हमारे पास कई विकल्प हैं। डायबिटीज या हाइपरटेंशन या अन्य रोगों की दवाएं ही नहीं, मरीज दवा उपलब्ध नहीं होने पर डॉक्टर्स से संपर्क कर दूसरी दवा लिखवा सकता है। मोदी ने बातचीत में माना कि कई बार लोकल परचेज में सप्लायर द्वारा दवाएं उपलब्ध कराने में थोड़ी देरी हो जाती है, जिसके कारण से मरीजों को कुछ असुविधा हो जाती है। …. ये खबर भी पढ़िए… नर्सिंगकर्मी के सुसाइड के बाद गर्भवती पत्नी ने पीया जहर:पिता बोले- बेटी डिप्रेशन में थी, सरकार ने कोई मदद नहीं की जयपुर में नर्सिंगकर्मी के सुसाइड के 25 दिन बाद दो महीने की गर्भवती पत्नी ने भी जहर खा लिया। महिला को गंभीर हालत में दौसा से सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल लाया गया। पूरी खबर पढ़िए…