जयपुर के आराध्य श्री गोविंददेवजी मंदिर में कल यानी शनिवार को राधाष्टमी का मुख्य उत्सव मनाया जाएगा। इस दौरान सुबह 4 बजे मंगला झांकी से विशेष दर्शन शुरू होंगे। इसके बाद सुबह 4:45 बजे ठाकुरानी श्री राधारानी जी का पंचामृत अभिषेक किया जाएगा। मंदिर में राधाष्टमी उत्सव की शुरुआत 14 सितंबर से हो चुकी है। मंदिर परिसर को बंधनवार, बधाई संदेश और विशेष रोशनी से सजाया गया है। दूध, दही, घी, बूरा और शहद से होगा अभिषेक राधाष्टमी पर राधारानी जी का दूध, दही, घी, बूरा और शहद से पंचामृत अभिषेक किया जाएगा। श्री गोविंद धाम के अधीन मंदिरों को मिलाकर कुल 111 किलो दूध, 51 किलो दही, 31 किलो बूरा, 6 किलो घी और 6 किलो शहद का इस्तेमाल होगा। अभिषेक के दौरान 5 वेदपाठी ब्राह्मणों की ओर से वेदपाठ किया जाएगा। इसके बाद राधाष्टमी की महाआरती के दर्शन होंगे। सुबह 4 बजे मंगला झांकी के दर्शन राधाष्टमी पर सुबह 4 बजे मंगला झांकी के दर्शन होंगे। इसके बाद सुबह 4:45 बजे राधारानी जी के अभिषेक दर्शन होंगे। अभिषेक से पहले महंत श्री अंजन कुमार गोस्वामी जी की ओर से तिथि पूजन किया जाएगा। अभिषेक झांकी में पंजीरी, लड्डू और मावा की बर्फी का भोग लगाया जाएगा। गोविंददेवजी का होगा विशेष श्रृंगार सुबह 7:45 बजे धूप झांकी के दर्शन होंगे। इससे पहले ठाकुर श्रीजी का अधिवास पूजन किया जाएगा। राधाष्टमी पर गोविंददेवजी को नवीन पीत-गुलाबी लप्पा जामा पोशाक पहनाई जाएगी। विशेष अलंकार, श्रृंगार और सिरपेच धारण कराया जाएगा। छप्पन भोग और बधाई उछाली जाएगी राजभोग झांकी से पहले राधारानी जी को कच्चे भोग में कई तरह के व्यंजन अर्पित किए जाएंगे। इसमें सादा चावल, मीठा चावल, नमकीन चावल, खिचड़ी, दाल, सब्जियां, खीर, पनीर की सब्जी समेत कई व्यंजन शामिल होंगे। इसके बाद छप्पन भोग झांकी के दर्शन होंगे। सुबह 9:30 बजे श्रृंगार झांकी खुलेगी। श्रृंगार आरती के बाद भानु नंदिनी उत्सव मनाया जाएगा और बधाई उछाली जाएगी। शाम को बरसाना महल फूल बंगला शाम को ठाकुर श्रीजी की विशेष बरसाना महल फूल बंगला झांकी सजाई जाएगी। विशेष उत्सव दर्शन शाम 7 बजे से रात 8:30 बजे तक होंगे। इसके बाद शयन झांकी के दर्शन होंगे। 14 सितंबर से चल रही राधाष्टमी उत्सव श्रृंखला मंदिर में राधाष्टमी उत्सव की 5 दिवसीय श्रृंखला 14 सितंबर से शुरू हुई। मंदिर के मुख्य द्वार पर शहनाई और नगाड़ा वादन शुरू किया गया। इसके साथ ही भजन मंडलियों और कलाकारों की ओर से ठाकुर श्रीजी को राग और नृत्य सेवा अर्पित की जा रही है। उत्सव की शुरुआत श्री गौरांग महाप्रभु संकीर्तन मंडल के कीर्तन से हुई।