करौली में इंटैक करौली अध्याय के सह संयोजक और वरिष्ठ साहित्यकार ‘राव’ शिवराज पाल सिंह ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास सिर्फ महान कवि नहीं, बल्कि दूरदर्शी समाज-सुधारक भी थे। उनके साहित्य ने ‘लोकरंजन’ और ‘सर्वजन हिताय’ की भावना से समाज को एकजुट करने का काम किया। सिंह ने यह बात जयपुर के ऐतिहासिक जयगढ़ दुर्ग के आराम महल में आयोजित विशेष लेक्चर में मुख्य वक्ता के रूप में कही। आम लोगों तक पहुंचाया शास्त्रीय ज्ञान लेक्चर में विद्वान, इतिहासकार और संस्कृति प्रेमी मौजूद रहे। शिवराज पाल सिंह ने भारत की सांस्कृतिक विरासत में तुलसीदासजी के योगदान पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने अवधी बोली में ‘रामचरितमानस’ की रचना की, जिससे शास्त्रीय ज्ञान आम लोगों तक पहुंचा। उन्होंने साहित्य को सामाजिक एकता का मजबूत माध्यम बनाया। कठिन समय में नैतिक आधार मजबूत किया सिंह ने कहा कि तुलसीदास की सोच और विचार हमेशा प्रासंगिक रहेंगे। कर्तव्य, नीति और ‘सर्वजन हिताय’ पर आधारित उनकी रचनाओं ने मुश्किल ऐतिहासिक समय में भी देश के नैतिक और सामाजिक ढांचे को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी यह सोच आज भी हमारी संस्कृति का आधार है। पांडुलिपियों के जरिए दिखाई विरासत लेक्चर के अंत में ‘राव’ शिवराज पाल सिंह ने अपने पांडुलिपि संग्रह से कुछ महत्वपूर्ण पन्ने भी दिखाए। पीपीटी के माध्यम से सवाई महाराजा प्रताप सिंह के आयुर्वेद ग्रंथ अमृत सागर, वृक्ष आयुर्वेद, गज होत्र, शालिहोत्र और कवि बिहारी की सतसई सहित कई ग्रंथों की पांडुलिपियां प्रदर्शित की गईं। इससे कार्यक्रम में साहित्य और ऐतिहासिक विरासत का एक अलग पक्ष भी सामने आया। डॉ. विक्रम सिंह भाटी के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन कार्यक्रम का आयोजन और संचालन डॉ. विक्रम सिंह भाटी के मार्गदर्शन में हुआ। जयगढ़ दुर्ग की क्यूरेटर लक्ष्मी सैनी और कल्याण सिंह शेखावत ने कार्यक्रम की व्यवस्थाएं संभालीं। इस मौके पर अहमदाबाद से रामस्वरूप सिंह शेखावत, वीरेंद्र कंवर, नीता भारद्वाज, बुनकर और पुरुषार्थ समेत कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।