सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने शहर में आवासीय भूमि पर चल रही कथित अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। जेडीए ने भांकरोटा क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित रिजॉर्ट, ब्यूटी पार्लर, फर्नीचर शोरूम, बुटीक, रेस्टोरेंट, गारमेंट शॉप और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिसों में संबंधित पक्षों को अवैध निर्माण हटाने और बिना अनुमति संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा नहीं करने पर सीलिंग, ध्वस्तीकरण और अन्य कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। जेडीए की यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है, जब सुप्रीम कोर्ट पूरे देश में आवासीय कॉलोनियों के बढ़ते व्यावसायीकरण पर गंभीर चिंता जता चुका है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि रिहायशी इलाकों में बिना अनुमति चल रही व्यावसायिक गतिविधियां नागरिक सुविधाओं, ट्रैफिक व्यवस्था, पर्यावरण और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं। इसी कारण सभी राज्यों की राजधानियों के विकास प्राधिकरणों और नगर निकायों को इस तरह के मामलों की पहचान कर कार्रवाई करने और विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई 25 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवासीय क्षेत्रों में हो रहे अवैध व्यावसायिक उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था। कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों, नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए थे कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में रिहायशी जमीन पर संचालित अवैध व्यवसायों की व्यापक जांच करें और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें। कोर्ट ने कहा था कि रिहायशी कॉलोनियों का व्यावसायीकरण अब केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की गंभीर चुनौती बन चुका है। इससे ट्रैफिक जाम, पार्किंग संकट, प्रदूषण, अग्नि सुरक्षा और आम नागरिकों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। भांकरोटा में कई प्रतिष्ठानों को नोटिस सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जेडीए ने जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1982 की धारा 32(1) और 32(6) के तहत भांकरोटा क्षेत्र में कई नोटिस जारी किए हैं। 13 जुलाई को जारी एक नोटिस में आरोप लगाया गया है कि आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत भूमि पर बिना अनुमति ब्यूटी लाउंज सहित अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि संबंधित पक्ष निर्धारित समय में अवैध निर्माण हटाएं और भूमि का उपयोग स्वीकृत उद्देश्य के अनुसार करें। आदेश की अवहेलना होने पर जेडीए कानून के तहत कार्रवाई करेगा। रिजॉर्ट से लेकर रेस्टोरेंट तक पर कार्रवाई यह मामला चिमनपुरा गांव, भांकरोटा स्थित उस भूमि से जुड़ा है, जहां राजदरबार पिंकसिटी डेवलपमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड ने दावा किया है कि उसकी प्रस्तावित आवासीय टाउनशिप की भूमि पर अवैध रूप से कई व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। कंपनी के अनुसार संबंधित भूमि पर रिजॉर्ट, फर्नीचर शोरूम, बुटीक, ब्यूटी सैलून, रेस्टोरेंट, गारमेंट दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान बिना वैध अनुमति के चल रहे हैं। कंपनी का आरोप है कि इस संबंध में उसने कई बार जेडीए, जयपुर विकास प्राधिकरण अपीलीय अधिकरण और राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए शिकायतें कीं, लेकिन लंबे समय तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला जब स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई तो कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी ने आवेदन दायर कर मांग की कि उसकी भूमि पर हो रहे कथित अवैध व्यावसायिक उपयोग को भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा देशभर में कराई जा रही जांच और कार्रवाई का हिस्सा बनाया जाए। जयपुर में पहली बड़ी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद जेडीए की ओर से जारी किए गए ये नोटिस जयपुर में इस प्रकार की पहली बड़ी कार्रवाई मानी जा रही हैं। इससे यह संकेत भी मिला है कि अब जेडीए केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की तैयारी में है। अब देखना होगा नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद जेडीए अवैध रिजॉर्ट, रेस्टोरेंट, ब्यूटी पार्लर और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई करता है या नहीं।