चूरू में एक युवक ने अपनी बड़ी बहन और उसके पाले हुए बंदर से परेशान होकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। युवक अपनी बहन और बंदर से छुटकारा दिलाने की मांग को लेकर कोतवाली थाने में पहुंचा। मामला शहर के वार्ड संख्या एक स्थित शिव कॉलोनी का है, जहां परिवार के भीतर बंदर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पुलिस ने इस मामले में हस्तक्षेप कर समझाइश के माध्यम से समाधान किया। घर में बहन ने पाल रखा है बंदर शिव कॉलोनी निवासी दिलीप सैनी अपनी छोटी बहन के साथ थाने पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनकी बड़ी बहन सावित्री सैनी (40) ने घर में एक बंदर पाल रखा है, जिसे वह अक्सर खुला छोड़ देती है। दिलीप का आरोप है कि बहन बंदर से घर के सदस्यों पर हमला करवाने का प्रयास करती है और बिना बात के झगड़ा करती है, साथ ही जान से मारने की धमकी भी देती है। परिवार के लोगों पर बंदर से हमला करवाने का आरोप परिवार के सदस्यों का कहना है कि वे बहन और बंदर दोनों से परेशान हैं। उनका आरोप है कि बहन परिवार के लोगों पर हमला करने के लिए बंदर को उकसाती है, जिससे घर में डर का माहौल बना रहता है। कालिका टीम ने की महिला से समझाइश मामले की जानकारी मिलने पर महिला पेट्रोलिंग की कालिका टीम मौके पर पहुंची। टीम की सदस्य कौशल्या और पूनम ने आरोपी महिला को समझाया और बंदर को सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए वन विभाग को सूचित कर आवश्यक कार्रवाई करने की सलाह दी। कोतवाली थानाधिकारी गौरव खिड़िया ने बताया कि इस संबंध में एक परिवाद थाने में आया था, लेकिन कोई मामला दर्ज नहीं किया गया। कालिका पेट्रोलिंग टीम ने समझाइश के बाद इसे निपटा दिया। 5 भाई-बहनों में सबसे बड़ी है बहन कोतवाली थाना में यह मामला शनिवार को दोपहर बाद आया था। दिलीप के पिता सांवरमल सैनी लाल मिर्च पिसाई का काम करते है। वह पिता के काम में मदद करता है। परिवार में 5 भाई-बहन है, जिनमे 2 भाई और 3 बहन है। दिलीप की बड़ी बहन सावित्री 40 वर्षीय और अविवाहित है। वह एमए फाइनल तक पढ़ी हुई है। करीब 4 साल पहले एक बाबा देकर गए थे बंदर दिलीप सैनी ने बताया कि करीब तीन-चार साल पहले उनकी दुकान पर एक बाबा यह छोटा सा बंदर का बच्चा देकर गये थे। उस समय सावित्री ने ऐसे ही इसको रख लिया। उन्होंने बताया कि सावित्री घर में टीवी पर ऑनलाइन ज्योतिष व राशि देखती रहती हैं। परिवार के व्यक्ति को अपने पास बैठा लेती हैं। उनको बोलती है कि मैं आपकी राशिफल देख दूंगी। एक बार परिवार के लोग बंदर को कहीं छोड़कर आ गये थे। मगर सावित्री को पता लगने पर वह उसे वापिस यह घर लेकर आ गई।