जयपुर एक बार फिर दुनिया भर के चर्चित लेखकों, इतिहासकारों, वैज्ञानिकों और सांस्कृतिक हस्तियों की मेजबानी के लिए तैयार है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 20वें संस्करण के लिए वक्ताओं की दूसरी सूची जारी कर दी गई है। इस सूची में व्यवसाय और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी अक्षता मूर्ति, हृदय रोग विशेषज्ञ एवं स्वास्थ्य जागरूकता के लिए काम करने वाले डॉ. श्रीराम नेने, नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक सर पॉल नर्स, पुलित्जर पुरस्कार विजेता लेखक बेंजामिन मोजर और इतिहासकार कैरोलीन एल्किन्स सहित कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के नाम शामिल हैं। इसके अलावा पत्रकार मिशाल हुसैन, कला-इतिहासकार नील मैकग्रेगर और लेखिका अदानिया शिब्ली भी फेस्टिवल में अपने विचार साझा करेंगी। 14-18 के बीच आयोजन होगा साहित्य, इतिहास, विज्ञान, राजनीति, कला, खान-पान और समकालीन समाज से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए दुनिया भर से वक्ता जयपुर पहुंचेंगे। फेस्टिवल का आयोजन 14 से 18 जनवरी 2027 तक होटल क्लार्क्स आमेर में होगा।
इस बार की वक्ता सूची में साहित्यिक उपलब्धियों के साथ-साथ सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बनाने वाली हस्तियों को भी प्रमुखता दी गई है। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री की पत्नी है अक्षता अक्षता मूर्ति व्यवसाय, परोपकार और सामाजिक प्रभाव के क्षेत्र में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। अक्षता ब्रिटेन के पूर्व पीएम ऋषि सुनक की पत्नी है और आईटी कंपनी इंफोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति की बेटी हैं। वहीं डॉ. श्रीराम नेने चिकित्सा और स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े विषयों पर चर्चा करेंगे। नेने बॉलीवुड एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित के पति है। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित आनुवंशिकीविद् और कोशिका-जीवविज्ञानी सर पॉल नर्स विज्ञान के क्षेत्र में अपने अनुभव और विचार साझा करेंगे।
पत्रकार लेखक शामिल होंगे पत्रकार, प्रसारक और लेखिका मिशाल हुसैन भी फेस्टिवल में शामिल होंगी। कला-इतिहासकार और ब्रिटिश म्यूजियम के पूर्व निदेशक नील मैकग्रेगर सांस्कृतिक इतिहास और कला के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के लिए मौजूद रहेंगे। एशियाई कला, संग्रहालयों और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर काम करने वाली कला-इतिहासकार विशाखा एन. देसाई भी वक्ताओं की सूची में शामिल हैं। पुलित्जर पुरस्कार विजेता लेखक और इतिहासकार भी आएंगे फेस्टिवल की दूसरी सूची में अंतरराष्ट्रीय साहित्य और इतिहास की कई प्रतिष्ठित हस्तियां शामिल हैं। पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित जीवनीकार बेंजामिन मोजर अपनी लेखकीय दृष्टि के साथ जयपुर पहुंचेंगे। प्राचीन भूमध्यसागरीय क्षेत्र और निकट पूर्व के इतिहास पर शोध करने वाले पुरातत्वविद् एवं इतिहासकार एरिक क्लाइन भी फेस्टिवल का हिस्सा होंगे। पूंजीवाद और वैश्विक आर्थिक इतिहास पर काम करने वाले हार्वर्ड के इतिहासकार स्वेन बेकर्ट भी अपनी विशेषज्ञता साझा करेंगे। वहीं भारतीय बौद्धिक इतिहास और राजनीतिक चिंतन की अध्येता अनन्या वाजपेयी भारतीय विचार परंपराओं और इतिहास से जुड़े विषयों को सामने रखेंगी।
साहित्यिक सत्रों में पहचान, परिवार, प्रवासन, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक टकराव जैसे विषय भी प्रमुख रहेंगे। फिलिस्तीनी लेखिका अदानिया शिब्ली अपने उपन्यास ‘माइनर डिटेल’ के लिए जानी जाती हैं। यह उपन्यास नेशनल बुक अवॉर्ड और इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार के लिए नामांकित हुआ था। उपन्यासकार क्लेयर मेसड का लेखन रिश्तों, पहचान और समकालीन जीवन के सवालों की पड़ताल करता है। ‘कास्ट मैटर्स’ के लेखक सूरज येंगड़े जाति, नस्ल और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे। उपन्यासकार, कवि और आलोचक तबिश खैर का लेखन प्रवासन, पहचान और संस्कृतियों के बीच संवाद पर केंद्रित है। हंसदा सौवेंद्र शेखर का कथा-साहित्य आदिवासी पहचान और समाज से जुड़े अनुभवों को सामने लाता है। कवि एवं उपन्यासकार मोना अरशी भी परिवार, अपनेपन और पहचान जैसे विषयों पर अपनी लेखकीय दृष्टि साझा करेंगी। प्रशंसित मलयालम लेखक और निबंधकार पॉल ज़कारिया का लेखन सामाजिक टिप्पणी, व्यंग्य और दार्शनिक चिंतन के लिए जाना जाता है। मराठी नाटककार, उपन्यासकार और रंगमंच निर्देशक मकरंद साठे भी वक्ताओं में शामिल हैं। इनके साथ शास्त्रीय साहित्य पर अकादमिक काम करने वाली मीरा सेओ, लेखिका एवं भाषाविद् थांगजम हिदुस्तानी देवी और लेखिका रॉक्सी नफूसी भी फेस्टिवल में हिस्सा लेंगी। मानव विकास, पुरातत्व और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी विमर्श जैविक मानवविज्ञानी, लेखिका और प्रसारक ऐलिस रॉबर्ट्स मानव विकासक्रम और पुरातत्व पर अपने काम के लिए जानी जाती हैं। फेस्टिवल में उनके शामिल होने से विज्ञान और मानव सभ्यता के विकास से जुड़े विषयों पर संवाद का अवसर मिलेगा। संघर्ष समाधान और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर काम करने वाली गैब्रिएल रिफकिंड भी वक्ताओं की सूची में हैं। उनके सत्रों में वैश्विक संघर्षों और संवाद के माध्यम से समाधान तलाशने जैसे विषयों पर चर्चा की संभावना रहेगी। इस तरह फेस्टिवल की दूसरी सूची केवल साहित्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें इतिहास, विज्ञान, अंतरराष्ट्रीय मामलों, समाज और संस्कृति के विविध आयाम शामिल हैं। आयोजकों के अनुसार, अलग-अलग क्षेत्रों की हस्तियों को एक मंच पर लाने का उद्देश्य विचारों के आदान-प्रदान और सार्थक बहस को बढ़ावा देना है। भारतीय भाषाओं के साहित्य पर रहेगा विशेष जोर जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की सह-संस्थापक, लेखिका और सह-निदेशक नमिता गोखले ने कहा कि फेस्टिवल का 20वां संस्करण नए विचारों, बदलती तकनीकों और दृष्टिकोणों के लिए खुला रहेगा। इसके साथ ही शास्त्रीय और कालजयी साहित्य से जुड़ाव भी बना रहेगा। उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक संस्करण में भारत के बहुभाषी साहित्य पर विशेष जोर होगा और प्रमुख भारतीय भाषाओं के लेखक सत्रों, परिचर्चाओं और पाठ के कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक संजॉय के. रॉय ने बताया कि फेस्टिवल की पहचान साहित्य, इतिहास, विज्ञान, दर्शन, भू-राजनीति और कला जैसे क्षेत्रों में जिज्ञासा तथा खोज की भावना से बनी है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग संस्कृतियों और महाद्वीपों से आने वाले लोगों को एक मंच पर लाकर ऐसी चर्चाओं को प्रोत्साहित करना जरूरी है, जो स्थापित मान्यताओं पर सवाल उठाएं और सोच का दायरा बढ़ाएं। फेस्टिवल के सह-निदेशक विलियम डैलरिंपल ने कहा कि आयोजन की शुरुआत के समय उन्होंने कल्पना नहीं की थी कि यह इतना बड़ा मंच बन जाएगा। उनके मुताबिक, भारत में कहानी कहने, विचारों के आदान-प्रदान और सार्वजनिक बहस की समृद्ध परंपरा रही है। फेस्टिवल ने इस परंपरा को दुनिया के दूसरे हिस्सों से संवाद का अवसर दिया है।