जयपुर आरटीओ प्रथम क्षेत्र के लोगों के लिए अब दूसरे आरटीओ कार्यालयों में जाकर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना आसान नहीं रहेगा। परिवहन विभाग ने ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक वाले जिलों में पिन कोड लॉक व्यवस्था लागू कर दी है। इसका मतलब है कि जिस इलाके का व्यक्ति जिस आरटीओ क्षेत्र में आता है, उसे उसी कार्यालय में लाइसेंस संबंधी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जयपुर आरटीओ प्रथम राजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि जगतपुरा स्थित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में लोग दूसरे परिवहन कार्यालयों में लाइसेंस बनवाने लगे थे। ट्रैक पर सख्ती से टेस्ट होने के कारण कई आवेदकों ने दूसरे आरटीओ कार्यालयों का रास्ता पकड़ लिया था। दो महीने के आंकड़ों ने दिखाया बड़ा फर्क आरटीओ प्रथम ने बताया- पिछले दो महीनों में जयपुर जिले के अन्य परिवहन कार्यालयों में 25 हजार से ज्यादा ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए, जबकि जगतपुरा ऑटोमेटेड ट्रैक पर इसी अवधि में केवल 1640 लाइसेंस बने। यह अंतर विभाग के लिए चिंता का विषय बना, क्योंकि ट्रैक पर नियमों के अनुसार जांच होने के बावजूद लोग दूसरे कार्यालयों में आवेदन कर रहे थे। आयुक्त को लिखा गया पत्र राजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि इस स्थिति को देखते हुए परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा को पत्र भेजा गया था। पत्र में सुझाव दिया गया कि क्षेत्राधिकार के आधार पर पिन कोड लॉक किया जाए, ताकि आवेदक अपने निर्धारित आरटीओ कार्यालय में ही आवेदन करें। अब दूसरे कार्यालयों में आवेदन नहीं होगा नई व्यवस्था लागू होने के बाद जयपुर आरटीओ प्रथम क्षेत्र के लोग आरटीओ सेकेंड या अन्य कार्यालयों में जाकर लाइसेंस प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाएंगे। आवेदन उसी कार्यालय में स्वीकार होगा, जहां का पिन कोड संबंधित क्षेत्र से जुड़ा होगा। दलालों और सेटिंग पर लगेगी रोक आरटीओ प्रथम ने बताया- पिन कोड लॉक होने के बाद दलालों और कुछ जगहों पर होने वाली अनियमित प्रक्रिया पर रोक लगेगी। अब आवेदक को तय नियमों के तहत अपने क्षेत्र के कार्यालय में ही टेस्ट और दस्तावेज प्रक्रिया पूरी करनी होगी। ऑटोमेटेड ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट होने से केवल योग्य व्यक्ति को ही लाइसेंस मिल सकेगा। इससे बिना सही जांच के लाइसेंस बनने की संभावना कम होगी और सड़क सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।