स्कूलों में विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़कर पढ़ाने और उनमें उद्यमिता की सोच विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में एआरसीएच कॉलेज ऑफ डिजाइन एंड बिजनेस, जयपुर की ओर से शहर के स्कूल शिक्षकों के लिए इम्पैक्ट-फोकस्ड एंटरप्रेन्योरशिप और स्कूल शिक्षा में डिजाइन सोच की भूमिका पर सम्मेलन एवं कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें 25 स्कूलों के 45 से अधिक शिक्षकों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने शिक्षकों को उद्यमिता और डिजाइन आधारित समस्या समाधान के अलग-अलग पहलुओं से परिचित कराया। खास बात यह रही कि शिक्षकों को केवल व्याख्यान तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि समूहों में बांटकर उन्हें वास्तविक उद्योगों को स्कूल के विषयों से जोड़ने का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया।
उद्योग को स्कूल के विषय से जोड़ने का अभ्यास कार्यशाला के दौरान शिक्षकों को आठ समूहों में बांटा गया। प्रत्येक समूह को किसी एक उद्योग को एनसीईआरटी के किसी विषय से जोड़ने की चुनौती दी गई। इसके बाद शिक्षकों ने उस क्षेत्र से जुड़े संभावित व्यावसायिक विचार, उत्पाद या रोजगार की भूमिका की कल्पना की। साथ ही यह भी तय किया कि स्कूल के किस पाठ या अध्याय के माध्यम से विद्यार्थियों को उस विचार से जोड़ा जा सकता है। इस गतिविधि का उद्देश्य शिक्षकों को यह समझाना था कि डिजाइन सोच और उद्यमिता को अलग-अलग विषयों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें रोजमर्रा की समस्याओं और वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़ा जा सकता है। इससे विद्यार्थियों में समस्या को पहचानने, सही सवाल पूछने और उसके समाधान के लिए नए विचार विकसित करने की क्षमता बढ़ाई जा सकती है। जयपुर एजुकेशनल फेस्टिवल के निर्माता संदीप सेठी ने कॉमर्स, बिजनेस स्टडीज और उद्यमिता की पढ़ाई में अनुभव आधारित सीख और वास्तविक जीवन के उदाहरणों को शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया को पाठ्यपुस्तकों से आगे ले जाना जरूरी है, ताकि विद्यार्थी वास्तविक परिस्थितियों को समझें, उनका विश्लेषण करें और समाधान के बारे में सोच सकें। एनसीईआरटी की कॉमर्स फैकल्टी की को-हेड डॉ. शिप्रा वैद्य ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने बहुविषयक और लचीली शिक्षा की जरूरत बताते हुए कहा कि स्कूलों को ऐसे सीखने के केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है, जहां उद्यमिता, परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता और समावेशी विकास पर काम हो। उन्होंने भाषाओं, विज्ञान, गणित एवं कोडिंग, सामाजिक विज्ञान, व्यावसायिक अध्ययन और अंतरविषयक अध्ययन जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि कॉमर्स और बिजनेस स्टडीज को केवल अलग-अलग विषयों के रूप में नहीं, बल्कि दूसरे क्षेत्रों से जोड़कर भी पढ़ाने की जरूरत है। कार्यशाला में उद्यमियों ने भी अपने वास्तविक अनुभव शिक्षकों के साथ साझा किए। ‘हैलो इंग्लिश–कल्चरएली’ के संस्थापक निशांत पटनी ने अपने तकनीकी स्टार्टअप की यात्रा और भाषा सीखने वालों की जरूरतों से उसके विकास की कहानी बताई। वहीं केसर स्वीट्स की सह-संस्थापक दिव्या अरोड़ा ने पारंपरिक मिठाई कारोबार में बदलती उपभोक्ता पसंद और कम चीनी वाले उत्पादों की बढ़ती मांग से जुड़ी चुनौतियों पर बात की। इमली जयपुर के संस्थापक शेखर गट्टानी ने भी अपने व्यक्तिगत अनुभवों के जरिए समस्या समाधान और उद्यमिता की सोच को समझाया। कार्यक्रम के दौरान ‘डिजाइन स्टोरी 26’, ‘डिजाइनाथॉन 26’, स्कूलों के लिए डिजाइन कल्चर प्रतियोगिता और एआईईईडी-सैट 2027 की शुरुआत की घोषणा भी की गई। एआईईईडी-सैट एआरसीएच के डिजाइन और उद्यमिता से जुड़े विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश और छात्रवृत्ति के लिए आयोजित अखिल भारतीय डिजाइन प्रवेश-सह-छात्रवृत्ति परीक्षा है।