जैसलमेर में अक्षय तृतीया और पीपल पूर्णिमा पर होने वाले संभावित बाल विवाहों को रोकने के लिए प्रशासन ने पूरी तरह से सख्त और व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। अतिरिक्त जिला कलेक्टर परसा राम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस बार ग्राउंड लेवल पर तैनात पटवारी से लेकर पुलिस अधिकारियों तक की जवाबदेही तय होगी। यदि कहीं भी नियमों की अनदेखी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रिंटिंग प्रेस से लेकर हलवाई तक की जिम्मेदारी तय प्रशासन ने बाल विवाह रोकने के लिए पूरे सपोर्ट सिस्टम को निगरानी के दायरे में लिया है। अब प्रिंटिंग प्रेस संचालकों को शादी के कार्ड छापने से पहले वर-वधू की आयु का प्रमाण लेना होगा या कार्ड पर उनकी जन्म तिथि अंकित करनी होगी। इसके साथ ही हलवाई, बैंड-बाजा, पंडित, टेंट हाउस और ट्रांसपोर्टर्स को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी स्थिति में बाल विवाह से जुड़ी सेवाएं न दें। सभी से इस संबंध में लिखित आश्वासन भी लिया जाएगा। लापरवाही पर अधिकारियों की जवाबदेही तय अतिरिक्त जिला कलेक्टर परसा राम सैनी ने कहा कि जिस क्षेत्र में बाल विवाह का मामला सामने आएगा, वहां के उपखंड अधिकारी और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। चौबीस घंटे सक्रिय रहेंगे नियंत्रण कक्ष बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक हिम्मत सिंह कविया ने बताया कि जिले में बाल विवाह रोकने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। जिला और ब्लॉक स्तर पर चौबीस घंटे सक्रिय रहने वाले नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही स्कूल, कॉलेज और ग्रामीण क्षेत्रों की रात्रि चौपालों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को समझाया जाएगा कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य के लिए भी गंभीर खतरा है। सूचना देने पर पहचान रहेगी गोपनीय अतिरिक्त जिला कलेक्टर सैनी ने आमजन से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले तो तुरंत नियंत्रण कक्ष में संपर्क करें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं- चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस नियंत्रण कक्ष 100, जैसलमेर स्थानीय नियंत्रण कक्ष 02992-294450 तथा राज्य हेल्पलाइन 181 पर सूचना दी जा सकती है।