जैसलमेर में मंगलवार शाम दशहरे का त्योहार उत्साह के साथ मनाया गया। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक दशहरे पर पूनमसिंह स्टेडियम में रावण दहन का आयोजन हुआ। शाम करीब 6:45 बजे शुरू हुए कार्यक्रम में हजारों शहरवासी शामिल हुए। कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने स्विच दबाकर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया। पुतलों में आग लगते ही स्टेडियम तालियों और जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान शानदार आतिशबाजी भी हुई, जिसे लोगों ने मोबाइल कैमरों में कैद किया। कार्यक्रम में विधायक छोटूसिंह भाटी, सभापति विजय डांगरा, कलेक्टर अनुपमा जोरवाल, एसपी अभिषेक शिवहरे सहित कई पार्षद और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। 3 मिनट में गिरे रावण-कुंभकर्ण और मेघनाद इस बार रावण दहन के दौरान पुतलों के गिरने का समय चर्चा का विषय रहा। आग लगने के करीब 3 मिनट में रावण और कुंभकर्ण के पुतले जलकर गिर गए, लेकिन मेघनाद का पुतला काफी देर तक खड़ा रहा। करीब 11 मिनट बाद भी पुतला नहीं गिरा तो नगर परिषद के कर्मचारियों ने उसकी रस्सी तोड़ दी। इसके बाद मेघनाद का पुतला नीचे गिरा और जलने लगा। इस दौरान मैदान में मौजूद लोगों की नजरें काफी देर तक पुतले पर टिकी रहीं। आधे घंटे तक आतिशबाजी से चमकता रहा आसमान रावण दहन के बाद करीब आधे घंटे तक आतिशबाजी हुई। रंग-बिरंगी रोशनी से आसमान जगमगा उठा। स्टेडियम में मौजूद लोगों ने आतिशबाजी का आनंद लिया और एक-दूसरे को दशहरे की बधाई दी। तीनों पुतलों और आतिशबाजी पर 10 लाख रुपए खर्च नगर परिषद की ओर से तीनों पुतलों के निर्माण और आतिशबाजी पर करीब 10 लाख रुपए खर्च किए गए। पुतले तैयार करने के लिए जोधपुर के 10 कारीगरों ने करीब एक महीने तक काम किया। इसके बाद पूनमसिंह स्टेडियम में पुतलों को स्थापित करने की तैयारियां पिछले चार दिनों से चल रही थीं। रावण 45 फीट, मेघनाद-कुंभकर्ण 40-40 फीट ऊंचे इस बार रावण का पुतला 45 फीट ऊंचा बनाया गया था, जबकि मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों की ऊंचाई 40-40 फीट थी। नगर परिषद ने आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए पहले से तैयारियां की थीं। बड़ी संख्या में शहरवासी रावण दहन देखने पहुंचे और उत्साह के साथ दशहरे का पर्व मनाया।