जैसलमेर में बारिश की कमी के कारण चारे और पानी का भारी संकट खड़ा हो गया है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री स्तर से पशुओं को बचाने के लिए तुरंत राहत देने के आदेश जारी किए गए हैं। स्थानीय विधायक छोटूसिंह भाटी की मांग पर मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने जैसलमेर जिला प्रशासन को तुरंत जरूरी कदम उठाने को कहा है। विधायक ने जयपुर में सचिव से खुद मिलकर अकाल राहत के खास नियम लागू करने और प्रभावित इलाकों में तुरंत पशु शिविर (कैंप) शुरू करने की मांग की थी। इसके बाद एक्शन में आए प्रशासन को पशुपालकों और गायों की सुरक्षा के लिए सबसे पहले और तय समय में राहत काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। विधायक ने उठाया था मुद्दा जैसलमेर के विधायक छोटूसिंह भाटी ने जिले में पशुओं के सामने खड़े हुए जान के संकट को मुख्यमंत्री के सामने प्रमुखता से उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजने के साथ ही जयपुर में मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव से खुद मुलाकात की। विधायक ने अफसरों को जिले के खराब हालातों के बारे में बताते हुए मांग की कि जैसलमेर में बिना किसी देरी के सरकारी पशु राहत कैंप खोले जाएं। इसके साथ ही, पशुओं के लिए पर्याप्त चारे और पीने के पानी का पूरा इंतजाम जमीन पर किया जाए। मुख्यमंत्री कार्यालय के सख्त निर्देश विधायक की इस तुरंत की गई कोशिश पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मामले को गंभीरता से लिया। मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से जैसलमेर के जिला कलेक्टर को खास निर्देश जारी किए गए हैं। इन आदेशों में साफ कहा गया है कि इलाके के पशुपालकों और उनके मवेशियों की भलाई को सबसे ऊपर रखा जाए। अकाल और चारे की कमी से परेशान इलाकों में समय पर राहत सामग्री और सुविधाएं पहुंचाई जाएं, ताकि किसी भी स्तर पर ढिलाई न हो। थारपारकर गायों का मुख्य इलाका मामले की गंभीरता को बताते हुए विधायक छोटूसिंह भाटी ने कहा कि जैसलमेर न केवल राजस्थान का सबसे बड़ा बॉर्डर का जिला है, बल्कि यह थारपारकर नस्ल की गायों का मुख्य इलाका भी है। इस खास नस्ल की गायों को बचाना हमारी बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा जताया कि राज्य सरकार के इस संवेदनशील फैसले से जिले में चारा-पानी की व्यवस्था मजबूत होगी और जरूरत वाले इलाकों में पशु शिविरों का काम अच्छे से शुरू हो पाएगा। विधायक ने पशुपालकों के हित में तुरंत फैसला लेने के लिए मुख्यमंत्री और उनके कार्यालय का आभार भी जताया।