राजस्थान हाईकोर्ट ने जैसलमेर के फतेहगढ़ क्षेत्र के बईया गांव में 2587 बीघा जमीन पर पेड़ों की कटाई पर अंतरिम रोक लगाई है। यह जमीन सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट के लिए आवंटित है। न्यायमूर्ति डॉ पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति संदीप शाह की खंडपीठ ने मुकंद सिंह भाटी और जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए विशेषज्ञ कमेटी गठित की और उनको जिम्मेदारी सौंपी। कमेटी 20 मई 2026 तक रिपोर्ट देगी, तब तक एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। सरकार का पक्ष: रिकॉर्ड में ओरण दर्ज नहीं सरकार और निजी कंपनी की ओर से मामले में अपना पक्ष रखा गया। राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि खसरा नंबर 386 की जमीन वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में ओरण श्रेणी में दर्ज नहीं है। सरकार के अनुसार, इस आधार पर सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट की प्रक्रिया नियमानुसार चल रही है। कंपनी का पक्ष: शर्तों के साथ प्रोजेक्ट निजी सोलर कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ सचिन आचार्य ने कहा कि सौर ऊर्जा भविष्य की जरूरत है। कंपनी ने वनीकरण और पर्यावरण से जुड़ी सभी शर्तों का पालन करने की बात कही। याचिकाकर्ता का दावा: 6500 से ज्यादा पेड़ याचिकाकर्ताओं के वकील परमवीर सिंह चंपावत ने पुराने राजस्व रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि यह जमीन ‘रोहिड़ालराय मंदिर ओरण’ के नाम से जानी जाती रही है। यहां खेजड़ी, जाल, रोहिड़ा और सेवण घास सहित करीब 6500 छोटे-बड़े पेड़ मौजूद हैं। साथ ही ‘मां देढ़सर तालाब’ वन्यजीवों और मवेशियों के लिए पानी का मुख्य स्रोत है। सुप्रीम कोर्ट आदेश का जिक्र हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के टीएन गोदावर्मन केस का जिक्र किया, जिसमें पवित्र उपवनों के संरक्षण के निर्देश दिए गए थे। कोर्ट ने माना कि जैसलमेर जैसे शुष्क क्षेत्र में इतने पेड़ों का होना पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है। 20 मई तक रिपोर्ट, तब तक रोक 22 अप्रैल 2025 को गठित विशेषज्ञों की कमेटी खसरा नंबर 386 की जमीनी हकीकत देखेगी। कमेटी को अपनी रिपोर्ट 20 मई 2026 तक कोर्ट में पेश करनी होगी। जब तक कमेटी की रिपोर्ट नहीं आती और कोर्ट का अगला आदेश नहीं होता, तब तक इस भूमि पर एक भी पेड़ नहीं काटा जा सकेगा।