जैसलमेर में विशाल मार्ट को ग्राहक से विज्ञापन में किए गए वादे के मुताबिक छूट न देना और बिल में हेराफेरी करना भारी पड़ गया है। जिला उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में गंभीर कमी और धोखाधड़ी मानते हुए मार्ट पर कुल 33 हजार से ज्यादा का जुर्माना लगाया है। आयोग ने सख्त आदेश दिया है कि मार्ट उपभोक्ता से ज्यादा वसूले गए 18.75 रुपए 45 दिन के भीतर लौटाए। इसके साथ ही उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए 13 हजार रुपए का मुआवजा दे और 20 हजार रुपए राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराए। समय पर भुगतान न करने पर 9 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। क्या है पूरा मामला? आयोग के निजी सचिव सुधांश सोनी के अनुसार, स्थानीय निवासी विजेंद्र खत्री ने अखबार और विज्ञापनों को देखकर विशाल मार्ट से खरीदारी की थी। वहां लिपटन ग्रीन-टी के बॉक्स पर 10 प्रतिशत छूट का टैग लगा था, जिससे 375 रुपए की ग्रीन-टी 337.50 रुपए में मिलनी चाहिए थी। लेकिन जब विजेंद्र ने घर जाकर बिल देखा, तो मार्ट ने उन्हें केवल 5 प्रतिशत की छूट देकर 356.25 रुपए वसूल लिए थे। इस तरह उनसे 18.75 रुपए ज्यादा लिए गए। मैनेजर ने नहीं सुनी बात, तो कोर्ट पहुंचे उपभोक्ता बिल में गड़बड़ी दिखने पर जब विजेंद्र ने मार्ट के मैनेजर से शिकायत की, तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और खराब व्यवहार किया। मार्ट के कस्टमर केयर से भी कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद विजेंद्र ने हार मानने के बजाय उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। सिद्धांतों की लड़ाई- आयोग ने सराहा मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पवन कुमार ओझा और सदस्य रमेश गौड़ की पीठ ने माना कि यह सीधे तौर पर ग्राहकों का शोषण है। बड़ी कंपनियां आकर्षक ऑफर देकर ग्राहकों को फंसाती हैं और बिलिंग के समय चालाकी करती हैं। आयोग ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ 18.75 रुपए की नहीं, बल्कि उपभोक्ता के अधिकारों और सिद्धांतों की है। विजेंद्र जैसे जागरूक ग्राहक ही ऐसी बड़ी कंपनियों के घपलों को सामने लाते हैं।