जाखम से जयसमंद बांध को भरने की परियोजना अब धरातल पर उतरती नजर आ रही है। जाखम बांध से जयसमंद होते हुए बड़गांव, मातृकुंडिया से मेजा बांध तक पानी ले जाने की डीपीआर तैयार की गई है। इस पर 12.50 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इसमें फिजिबिलिटी रिपोर्ट को सीडब्ल्यूसी दिल्ली में अनुमोदन के लिए भेज रखा है। सरकार से अनुमति मिलते ही प्रोजेक्ट में कार्य शुरू होगा। इस परियोजना से उदयपुर जिले में खत्म होगी पेयजल की समस्या भी खत्म होगी। इस परियोजना की कुल लागत 10 हजार करोड़ रुपए है। जाखम बांध से जयसमंद झील की दूरी करीब 100 किमी है। जाखम बांध ऊंचाई पर होने से ग्रेविटी के जरिये पानी जयसमंद में पहुंचेगा। ये है योजना... जयसमंद से बड़गांव बांध में पंपिंग करके पानी डायवर्ट करेंगे योजना के अनुसार जयसमंद से बड़गांव बांध में पंपिंग करके पानी डायवर्ट किया जाएगा। पहले जयसमंद और बड़गांव बांध को भरा जाएगा। फिर इसमें 2500 से 3000 एमसीएफटी पानी बड़गांव बांध में भेजा जाएगा। इसके बाद अतिरिक्त पानी उपलब्ध होने पर मातृकुंडिया, मेजा और भोपालसागर बांध में डायवर्ट होगा। इस योजना से उदयपुर जिले के मावली, वल्लभनगर, भींडर सहित विभिन्न क्षेत्रों और गांवों की पेयजल समस्या खत्म होगी। सलूंबर जिले में 50 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। यह नया रकबा होगा। इससे पहले जयसमंद झील से 17 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के लिए पानी दिया जाता है। फायदा - हर साल लबालब रहेगी जयसमंद झील, पर्यटन भी बढ़ेगा जयसमंद झील की भराव क्षमता 14 हजार एमसीएफटी है। इसमें से 12 हजार एमसीएफटी पानी पेयजल व कृषि के काम आता है। मानसून में हर साल झील में 8 हजार एमसीएफटी पानी जमा होता है। इसमें से 4 हजार एमसीएफटी पानी सिंचाई और कृषि के लिए दिया जाता है। 4 हजार एमसीएफटी पानी की और जरूरत रहती है। मानसून में हर साल बदलाव आने से झील कई बार खाली रह जाती है। जाखम से पानी आने पर जयसमंद हर साल लबालब रहेगी, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।