जयसमंद झील में जलस्तर कम होने के कारण रबी फसल 2026-27 (संवत् 2083) के लिए किसानों को इस बार सिर्फ दो बार सिंचाई का पानी मिलेगा। नहरों में 10 नवंबर से पानी छोड़ा जाएगा। जल वितरण व्यवस्था तय करने के लिए गुरुवार को जयसमंद झील की पाल स्थित सिंचाई विभाग कार्यालय परिसर में बैठक हुई। जिला कलेक्टर एवं जल वितरण समिति अध्यक्ष मुहम्मद जुनेद पी.पी. की अध्यक्षता में हुई बैठक में सिंचाई व्यवस्था और किसानों की समस्याओं पर चर्चा की गई। नहरों की सफाई नहीं होने से आखिरी छोर तक नहीं पहुंचता पानी बैठक में दाएं और बाएं मुख्य नहर क्षेत्र के किसानों और समिति सदस्यों ने नहरों की खराब हालत का मुद्दा उठाया। किसानों ने कहा कि समय पर नहरों की सफाई नहीं होने से सिंचाई में परेशानी होती है। कई जगह नहरों के आखिरी छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता। किसानों ने मांग की कि पानी छोड़ने से पहले नहरों की सफाई कराई जाए और गेटों के रखरखाव में सुधार किया जाए। इससे सीमित मात्रा में उपलब्ध पानी का बेहतर उपयोग हो सकेगा और खेतों तक पानी पहुंचाने में होने वाली परेशानी कम होगी। बीज-खाद की उपलब्धता और वन्यजीवों से फसल नुकसान का मुद्दा उठाया बैठक में किसानों ने कृषि विभाग से समय पर बीज और खाद नहीं मिलने की समस्या भी रखी। इसके अलावा नीलगाय, पैंथर और जंगली सूअरों से फसलों को हो रहे नुकसान पर चिंता जताई। किसानों ने फसलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी उपाय करने की मांग की। कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए समाधान के निर्देश जिला कलेक्टर मुहम्मद जुनेद पी.पी. ने किसानों की समस्याएं सुनीं और संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने सिंचाई व्यवस्था में सुधार करने और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए कदम उठाने को कहा। सिंचाई, कृषि और वन विभाग के अधिकारी रहे मौजूद बैठक में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता निर्मल मेघवाल, सराड़ा के सहायक अभियंता भावेश पाटीदार और सलूंबर के सहायक अभियंता ईश्वर सुधार मौजूद रहे। कनिष्ठ अभियंता मनोहर लाल मीणा और कपिल मेहता भी बैठक में शामिल हुए। इसके अलावा कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वन विभाग के जयसमंद रेंजर डॉ. राजेंद्र महला, जल वितरण समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।