मानदेय बढ़ाने सहित अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर सोमवार को आंगनबाड़ी महिला कार्मिकों ने जालोर जिला कलेक्ट्रेट का घेराव किया। सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। मांगें पूरी नहीं होने पर कार्यकर्ताओं ने आज से आंगनबाड़ी केंद्रों की तालाबंदी करने की चेतावनी दी और अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। सुबह करीब 12 बजे सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रैली निकालकर नारेबाजी करते हुए जिला कलेक्ट्रेट के सामने पहुंचे, जहां उन्होंने जिला कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट तथा जालोर अस्पताल चौराहे से आहोर चौराहे तक जाने वाले मार्ग को जाम कर करीब 25 मिनट तक नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान महिलाओं ने '10 हजार में दम नहीं, 25 हजार से कम नहीं' और 'अभी करो, इसी वक्त करो, हमें परमानेंट करो' जैसे नारे लगाए। इस दौरान महिला कार्मिकों ने अपनी मांगों के समर्थन में और सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान महिलाओं ने मुख्यमंत्री के नाम जालोर एडीएम राजेंद्र सिंह चंदावत को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक वे आंगनबाड़ी केंद्रों की तालाबंदी करेंगी और कोई कार्य नहीं करेंगी।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जशोदा ने कहा कि एक तरफ मध्यप्रदेश सरकार अपने आंगनबाड़ी कार्मिकों को 13 से 15 हजार रुपए तक मानदेय दे रही है, वहीं राजस्थान में महज 6 से 10 हजार रुपए का अल्प मानदेय दिया जा रहा है। यह मामूली मानदेय भी पिछले लंबे समय से बकाया चल रहा है, जिससे परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। 11 सूत्री मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई की मांग
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्मिकों को नियमित कर्मचारी बनाने के लिए एक ठोस नीति बनाई जाए। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक कोर्ट के निर्णयानुसार न्यूनतम मजदूरी 20,000 से 25,000 रुपए प्रति माह किए जाए। महिला एवं बाल विकास विभाग में ठेका प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही कुम्हेर परियोजना के ठेका कार्यकाल की ऑडिट कराई जाए। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से जनगणना, सेनेटरी नैपकिन का ऑनलाइन वितरण जैसे गैर-विभागीय कार्य करवाना तुरंत बंद किया जाए। नैपकिन का ऑफलाइन वितरण ही कार्मिकों से कराया जाए। बजट घोषणा 2025-26 के अनुसार सेवानिवृत्त आंगनबाड़ी कार्मिकों को ग्रेच्युटी भुगतान करने का ऐलान किया गया था, लेकिन आज तक इसका आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। सरकार तुरंत यह आदेश जारी करे। जेब से भर रहे भवन का किराया
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आज के दौर में भी ग्रामीण इलाकों में 200 रुपए और शहरी क्षेत्रों में 750 रुपए भवन किराया दिया जा रहा है, जो बेहद कम है। केंद्र सरकार के 1,000 से 4,000 रुपए तक के प्रावधान के बावजूद कार्यकर्ताओं को अपनी जेब से किराया भरना पड़ रहा है, जिसे सुधारा जाए। सेवानिवृत्ति के समय कार्मिकों को एकमुश्त 10 लाख रुपए नकद मिलने चाहिए, जो उनके मानदेय राशि के 50% से कम न हो। सेवानिवृत्त हो चुके मानदेय कार्मिकों को उनकी सामूहिक बीमा योजना की राशि का भुगतान 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाए। 3 से 6 साल तक के छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि 30 जून तक बढ़ाई जाए।