जसोल के श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान में शारदीय नवरात्र महोत्सव के तहत आसोज शुक्ल पक्ष द्वितीया और तृतीया पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से पहुंचे भक्तों ने मां जसोल के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। मंदिर परिसर मां जसोल के जयकारों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाईसिंहजी, श्री लाल बन्नासा, श्री खेतलाजी और श्री काला-गौरा भैरूजी के मंदिरों में पूजा-अर्चना की। नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप और तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की विधिवत आराधना की गई। सर्वसमाज की कन्याओं का पूजन मंदिर संस्थान की ओर से दोनों दिन सर्वसमाज की कन्याओं का पूजन किया गया। कन्याओं के पैर धोकर तिलक लगाया गया और पूजा-अर्चना के बाद उन्हें दक्षिणा, फल, प्रसाद और भोजन कराया गया। आयोजन के माध्यम से मातृशक्ति के प्रति सम्मान और सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया। शारदीय नवरात्र की तृतीया पर श्री नर्बदेश्वर महादेव मंदिर के महंत श्री श्री 1008 गणेशपुरीजी महाराज के सान्निध्य में संस्थान के प्रवक्ता कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने भी कन्याओं का पूजन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में कन्याओं को आदिशक्ति का स्वरूप माना गया है। कन्या पूजन श्रद्धा, सम्मान और सामाजिक समरसता की भावना को मजबूत करता है। अध्यक्ष ने हवन में आहुतियां देकर की सुख-समृद्धि की कामना संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने श्री राणीसा भटियाणीसा मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन में आहुतियां अर्पित कीं। उन्होंने श्रद्धालुओं के सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य के साथ क्षेत्र की उन्नति, राष्ट्र की समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की। उन्होंने कहा कि शारदीय नवरात्र आदिशक्ति की उपासना, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक चेतना का पर्व है। मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, त्याग और धैर्य की प्रतीक हैं, जबकि मां चंद्रघंटा साहस, वीरता और शांति का संदेश देती हैं। नवरात्र नवमी तक अनुष्ठान, पूर्णिमा तक जागरण संस्थान के अनुसार, 11 अक्टूबर को घटस्थापना के साथ शुरू हुए नवरात्र के विशेष धार्मिक अनुष्ठान नवमी तक जारी रहेंगे। श्री दूधेश्वर वेद विद्यापीठ, गाजियाबाद से आए विद्वान आचार्यों और पंडितों की ओर से प्रतिदिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना, विशेष हवन और धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। मंदिर परिसर में प्रतिपदा से शुरू हुए रात्रिकालीन जागरण पूर्णिमा तक जारी रहेंगे। इनमें भजनों और धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से मां जसोल की महिमा का गुणगान किया जा रहा है। मां जसोल के प्रसाद के रूप में बांट रहे खेजड़ी के पौधे मंदिर संस्थान की ओर से पर्यावरण संरक्षण के लिए 13 लाख खेजड़ी के पौधों को प्रसाद स्वरूप वितरित करने की पहल भी जारी है। मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को खेजड़ी के पौधे दिए जा रहे हैं। रावल किशन सिंह जसोल ने भक्तों से इन पौधों को घरों, खेतों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर लगाने तथा उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से पौधों के रोपण और संरक्षण को 12 साल तक विशेष धार्मिक संकल्प के रूप में अपनाने की अपील की। संस्थान का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण और खेजड़ी की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना है। संस्थान के प्रवक्ता कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने श्रद्धालुओं से मां जसोल के जन्मोत्सव पर अपने लगाए खेजड़ी के पौधे के साथ सेल्फी लेकर संस्थान के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट को टैग करने की अपील की। इससे पौधों की सालाना वृद्धि और उनके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं नवरात्र महोत्सव में बढ़ती भीड़ को देखते हुए संस्थान की ओर से दर्शन, सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल और प्रसाद वितरण सहित आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि देशभर से आने वाले श्रद्धालु सुगमता से दर्शन कर सकें और धार्मिक आयोजनों में भाग ले सकें। देखें PHOTOS-