जावाल स्थित कृष्णावत नदी के किनारे बुधवार से उर्ध्व हट योगी रामगिरि महाराज की '11 धूनी अग्नि तपस्या' का विधिवत शुभारंभ हुआ। धर्म, अध्यात्म और जन-कल्याण के संकल्प के साथ शुरू की गई यह साधना क्षेत्र में श्रद्धा और कौतूहल का केंद्र बनी हुई है। यह महाअनुष्ठान परम पूज्य रमणभारती महाराज एवं संगमगिरि महाराज के पावन सान्निध्य तथा उनके शिष्य राजगिरि महाराज की गरिमामयी मौजूदगी में शुरू हुआ। इस तपस्या की कठोरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां वर्तमान में जावाल का तापमान 40°C के करीब पहुंच रहा है, वहीं महाराज जलती हुई 11 धूनियों (अग्नि कुंडों) के बीच बैठकर साधना में लीन हैं। महाराज ने संकल्प लिया है कि वे पूरी तपस्या के दौरान अपने दोनों हाथ निरंतर ऊपर उठाकर रखेंगे। भक्तों के अनुसार, महाराज का एक हाथ सदैव ऊपर रहने का संकल्प पहले से था, किंतु इस विशेष साधना के दौरान वे दोनों हाथ ऊपर रखकर अग्नि के बीच बैठ रहे हैं। भक्त पृथ्वीराज सेन ने बताया कि रामगिरि महाराज की इस 41 दिवसीय साधना के पीछे गहरे जनकल्याणकारी उद्देश्य छिपे हैं। महाराज यह कठोर तप विश्व शांति, गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने और समाज में बढ़ते नारी अत्याचार के विरोध में कर रहे हैं। इस आत्मिक तप के माध्यम से वे समाज में सकारात्मक ऊर्जा और जनजागरण का संदेश देना चाहते हैं। तपस्या के पहले ही दिन आश्रम में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। दोपहर 12:00 बजे से शाम 3:00 बजे तक चलने वाली इस अग्नि साधना को देखने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंच रहे हैं। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना हुआ है और प्रतिदिन यहां धार्मिक प्रवचनों का भी आयोजन किया जाएगा। आश्रम प्रबंधन ने समस्त क्षेत्रवासियों को इस पावन अनुष्ठान में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ अर्जित करने का आह्वान किया है।