बस की टक्कर में सरकारी कर्मचारी की मौत के करीब पांच साल बाद कोर्ट ने पीड़ित परिवार के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। नागौर की जायल एडीजे कोर्ट ने दि ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को मृतक के परिजनों को 1.11 करोड़ रुपए मुआवजा देने के आदेश दिए है। कंपनी को दावा दायर होने की तारीख से भुगतान तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। यानी कंपनी को करीब 1.53 करोड़ रुपए देने होंगे। संभवत: जिले का यह पहला ऐसा मामला है जब कोर्ट ने इतनी बड़ी राशि में मुआवजा तय किया है। कोर्ट ने गुरुवार को मोटर वाहन अधिनियम के तहत फैसला सुनाया है। पढ़िए … सिलसिलेवार पूरा मामला ऑफिस जाते समय बस ने मारी थी टक्कर अशोक कुमार सैन नागौर जिला परिषद में पंचायत प्रसार अधिकारी थे। 21 अप्रैल 2021 को वे कार्यालय के काम से मुंडवा जा रहे थे। इसी दौरान मुंडवा से वाया रोल-डीडिया होते हुए जायल जा रही निजी बस, जिसे उसके मालिक मेहराम (50) खुद चला रहा था। रोल और डीडिया गांव के बीच सड़क के तेज घुमाव पर सामने से आ रही उनकी बाइक से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि अशोक कुमार सैन उछलकर सड़क पर गिर गए। उनका हेलमेट टूट गया और सिर में गंभीर चोट लगने से मौके पर ही उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद बस मालिक पर केस, मुआवजे के लिए कोर्ट पहुंचे परिजन हादसे के बाद मृतक के परिजनों ने रोल थाने में बस मालिक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने का मामला दर्ज कराया। इसके साथ ही मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) के तहत मुआवजे की मांग करते हुए जायल एडीजे कोर्ट में बस मालिक और दि ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ दावा पेश किया। पांच साल चली सुनवाई, फिर आया ऐतिहासिक फैसला करीब पांच साल तक चली सुनवाई के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकास राम चौधरी ने 19 पेज का फैसला सुनाया। कोर्ट ने इंश्योरेंस कंपनी को 1.11 करोड़, 14, 226 हजार रुपए मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही याचिका दायर होने की तारीख से भुगतान होने तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने के निर्देश दिए है। सात परिजनों में इस अनुपात में बंटेगी मुआवजा राशि मृतक अशोक कुमार सैन अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और चार बच्चों का परिवार छोड़ गए हैं, जिनमें दो बच्चे नाबालिग हैं। कोर्ट के आदेश के अनुसार मुआवजा राशि का 40 प्रतिशत उनकी पत्नी सुमन को मिलेगा। वहीं बेटी नेहा, बेटी स्वाति, नाबालिग पुत्री जयश्री, नाबालिग पुत्र शरद, माता शांति देवी और पिता हनुमानराम को 10-10 प्रतिशत राशि दी जाएगी। लापरवाही से मौत के मामले में फैसला आना बाकी अधिवक्ता ओमप्रकाश सैन ने बताया - मृतक ने कोई अलग से व्यक्तिगत इंश्योरेंस नहीं कराया था। उन्हें विभागीय नियमों के तहत मिलने वाले सभी लाभ और क्लेम अलग से मिल चुके हैं। इसके अलावा बस ड्राइवर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304ए (लापरवाही से मौत) के तहत दर्ज आपराधिक मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है, जिसमें फैसला आना बाकी है।