JEE Main परीक्षा में इस बार फिजिक्स का पेपर मॉडरेट स्तर का रहा, जिसमें करीब 22 प्रतिशत सवाल क्लास 11 के सिलेबस से पूछे गए। वहीं केमिस्ट्री सेक्शन में अधिकतर प्रश्न NCERT आधारित रहे, जिससे अच्छी तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को राहत मिली। कुल मिलाकर पेपर संतुलित रहा और स्टूडेंट्स के लिए स्कोरिंग के अच्छे मौके बने। देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन 2026 (अप्रैल सेशन) की शुरुआत गुरुवार को हुई। पहले दिन का पेपर कुल मिलाकर मध्यम स्तर का रहा, लेकिन इसकी खासियत रही कि प्रश्न पूरी तरह कॉन्सेप्ट आधारित थे। यानी सिर्फ रटने वाले छात्रों के लिए नहीं, बल्कि विषय की गहरी समझ रखने वालों के लिए यह पेपर ज्यादा अनुकूल रहा। एजुकेशन एक्सपर्ट विनोद कुमावत ने स्टूडेंट्स के फीडबैक के आधार पर बताया कि 22 जनवरी की पहली पारी की तुलना में यह पेपर थोड़ा ज्यादा चैलेंजिंग महसूस हुआ। इसमें एप्लिकेशन आधारित प्रश्नों की संख्या अधिक रही, जिससे छात्रों की वास्तविक तैयारी का आकंलन हुआ। फिजिक्स का पेपर मॉडरेट और कॉन्सेप्चुअल रहा। इसमें 11वीं कक्षा से 44% और 12वीं से 56% प्रश्न पूछे गए। सेमीकंडक्टर, एरर, यूनिट एंड डाइमेंशन से एक-एक प्रश्न आए, जबकि मैग्नेटिज्म, ज्योमेट्रिकल ऑप्टिक्स और फ्लुइड से दो-दो सवाल पूछे गए। इलेक्ट्रो डायनेमिक्स, मॉडर्न फिजिक्स, हीट एंड थर्मोडायनेमिक्स और वेव ऑप्टिक्स से तीन-तीन प्रश्न आए, जबकि मैकेनिक्स का वेटेज सबसे ज्यादा रहा। केमिस्ट्री: NCERT पर पकड़ वालों को फायदा केमिस्ट्री का स्तर भी मध्यम रहा, लेकिन इसमें NCERT आधारित प्रश्नों का दबदबा देखने को मिला। करीब 30% प्रश्न 11वीं और 70% 12वीं कक्षा से आए। फिजिकल और ऑर्गेनिक केमिस्ट्री का वेटेज ज्यादा रहा। मोल कॉन्सेप्ट, थर्मोडायनेमिक्स और केमिकल काइनेटिक्स से दो-दो प्रश्न आए, वहीं ऑर्गेनिक में एल्किल हेलाइड्स और एरोमेटिक कंपाउंड से सवाल पूछे गए। इनऑर्गेनिक में कॉर्डिनेशन कंपाउंड अहम रहा। मैथ्स: लंबा पेपर, समय बना सबसे बड़ा फैक्टर मैथ्स का पेपर मध्यम स्तर का होने के बावजूद काफी लंबा रहा। यही वजह रही कि छात्रों के लिए टाइम मैनेजमेंट सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया। एलजेब्रा और कैलकुलस से 36-36% प्रश्न पूछे गए, जबकि वेक्टर 3D और कॉर्डिनेट ज्योमेट्री से 12-12% सवाल आए। समझ वाले आगे, रटने वाले पीछे पहले दिन के पेपर ने साफ संकेत दे दिया कि अब परीक्षा का पैटर्न पूरी तरह कॉन्सेप्ट और एप्लिकेशन पर शिफ्ट हो चुका है। ऐसे में जिन छात्रों ने केवल रटकर तैयारी की थी, उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ा, जबकि मजबूत बेसिक्स और प्रैक्टिस करने वाले छात्रों के लिए यह पेपर स्कोरिंग साबित हो सकता है।