झालावाड़ में कृषि विज्ञान केंद्र ने खुदरा उर्वरक विक्रेताओं के लिए 15 दिन का सर्टिफिकेट कोर्स पूरा किया। मंगलवार को इस कोर्स का दूसरा बैच खत्म हुआ। 7 से 22 सितंबर तक चले इस प्रशिक्षण में जिले के 35 उर्वरक विक्रेताओं ने हिस्सा लिया। समापन पर सभी को प्रमाण-पत्र भी दिए गए। केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक और अध्यक्ष डॉ. संतोष झाझड़िया ने बताया कि खेतों में रसायनों, उर्वरकों और कीटनाशकों का गलत इस्तेमाल मिट्टी की सेहत खराब करता है। इससे कृषि उत्पादों में इनके अंश भी पहुंच सकते हैं, जो इंसानों और जानवरों की सेहत के लिए खराब हैं। उन्होंने मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों के सही इस्तेमाल पर जोर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने कहा कि किसानों तक सही और वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने में उर्वरक विक्रेताओं की अहम भूमिका है। उन्होंने सभी प्रशिक्षणार्थियों से किसानों के हित में ईमानदारी से काम करने को कहा। केंद्र के प्रसार शिक्षा वैज्ञानिक और प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. मोहम्मद यूनुस ने बताया कि प्रशिक्षण में कई विशेषज्ञों ने लेक्चर और प्रैक्टिकल सेशन लिए। इसमें मिट्टी की सेहत, पोषक तत्वों का प्रबंधन, अलग-अलग उर्वरकों की पहचान, सही भंडारण और परिवहन के तरीके सिखाए गए। साथ ही, उर्वरक बेचते समय बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी भी दी गई। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण का मकसद विक्रेताओं को उर्वरकों के सुरक्षित, संतुलित और सही इस्तेमाल की वैज्ञानिक जानकारी देना था। ताकि वे किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरक उपयोग की सही सलाह दे सकें। प्रशिक्षण पूरा करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र दिए गए, जो उर्वरक बेचने का लाइसेंस लेने के लिए जरूरी हैं। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. हितेश मुवाल, सुनीता कुमारी, अजय सिंह शेखावत, महेश कुमार और शाहरुख खान ने मदद की।