झालावाड़ में एक मूक बधिर नाबालिग से छेड़छाड़ के मामले में विशिष्ट न्यायालय पॉक्सो कोर्ट न-1 ने आरोपी ससुर को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। विशिष्ट लोक अभियोजक गिरिराज नागर ने बताया कि 22 जून को गंगधार थाने में 17 वर्षीय मूक बधिर नाबालिग ने लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पीड़िता ने बताया कि वह कक्षा आठ तक पढ़ी है और उसका बड़ा भाई व माता भी जन्म से मूक बधिर हैं। पीड़िता की शादी थाना इलाके के एक गांव में हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार 9 जून को पीड़िता अपने ससुर के साथ बाइक से ससुराल जा रही थी। रास्ते में ससुर ने पेशाब का बहाना कर बाइक रोकी और पीड़िता के साथ छेड़छाड़ करने लगा। पीड़िता के विरोध करने पर भी वह छेड़छाड़ करता रहा और उसके शरीर पर हाथ फेरता रहा। शाम करीब 5 बजे पीड़िता ससुराल पहुंची और रात को खाना खाकर सो गई। रात 10-11 बजे पीड़िता के कमरे की कुंडी की आवाज आई। दरवाजा खोलने पर ससुर जबरन कमरे में घुस आया और पीड़िता के साथ जबरदस्ती करने लगा। पीड़िता चिल्लाते हुए कमरे से बाहर आ गई। पीड़िता ने तुरंत अपने पिता को वीडियो कॉल कर घटना के बारे में बताया। इसके बाद उसने पीहर आकर गंगधार थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। जिला कलेक्टर के आदेश पर पीड़िता को एक ट्रांसलेटर भरतलाल उपलब्ध कराया गया, जिसने मूक बधिर पीड़िता के कथनों और वीडियोग्राफी कथनों को समझकर थाने में हस्तलिखित प्रार्थना पत्र पेश किया। अपराध पॉक्सो एक्ट के तहत प्रमाणित पाए जाने पर उच्चाधिकारियों के आदेशानुसार प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ किया गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।