झुंझुनूं में सरकारी अस्पतालों में अब व्यवस्था में बदलाव होने जा रहे है। जिससे अब स्टॉफ और डॉक्टरों को परेशानी नहीं होगी। दरअसल, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने 31 जुलाई तक सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में 'इंटीग्रेटेड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम' (IHMS) के 'डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल' को लागू करने के निर्देश दिए है। इस नई व्यवस्था के बाद मरीजों को न केवल बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी, बल्कि उनका पूरा उपचार इतिहास एक क्लिक पर उपलब्ध होगा। ​सुरक्षित रहेगा इलाज का रिकॉर्ड अक्सर ऐसा होता है कि मरीज अस्पताल की पुरानी पर्ची और जांच रिपोर्ट खो देते है या फिर साथ लेकर नहीं आते है। जिससे दोबारा इलाज शुरू करते समय पुरानी जानकारियां नहीं मिल पाती। अब डॉक्टरों के साथ-साथ मरीजों का भी इस समस्या का समाधान हो गया है। नई व्यवस्था में प्रत्येक मरीज का आभा (ABHA) लिंक्ड इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR) तैयार किया जाएगा। इससे ये फायदा होगा कि मरीज प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में जाता है, तो डॉक्टर कंप्यूटर के जरिए उसका पिछला उपचार और जांच आसानी से देख सकेंगे। ​डॉक्टरों का काम होगा आसान ​चिकित्सा विभाग ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल व्यवस्था के दौरान डॉक्टरों को अतिरिक्त बोझ महसूस न हो, इसके लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। डेटा एंट्री के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर, जीएनएम, नर्सिंग स्टाफ और इंटर्न की सेवाएं ली जाएंगी। हालांकि, उपचार का निर्णय, दवाओं का चयन और अंतिम ई-प्रिस्क्रिप्शन की जिम्मेदारी पूरी तरह से संबंधित चिकित्सक की ही होगी। ​प्रत्येक चिकित्सक को लॉगिन आईडी, कंप्यूटर, इंटरनेट और अन्य तकनीकी सुविधाएं विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जाएंगी। ​अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ी ​चिकित्सा विभाग ने प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) और प्रमुख चिकित्सा अधिकारियों (PMO) को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे 31 जुलाई तक अपने अधीन आने वाले सभी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में इस मॉड्यूल का 100 प्रतिशत संचालन सुनिश्चित करें। ​जिले के अधिकारियों ने बताया- स्वास्थ्य संस्थानों में कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट या आईटी उपकरणों की कमी होने पर उनकी तुरंत खरीद की जाएगी। साथ ही, स्टाफ को तकनीकी प्रशिक्षण और हैंडहोल्डिंग सपोर्ट देने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और स्मार्ट होगी डॉ. छोटेलाल गुर्जर, सीएमएचओ ने बताया-​ मरीजों की सुविधा के लिए हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। डॉक्टर डेस्क मॉड्यूल के लागू होने से सरकारी अस्पतालों में इलाज की पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और स्मार्ट हो जाएगी। जिला और ब्लॉक स्तर पर तकनीकी टीमें लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं ताकि 31 जुलाई के बाद किसी भी मरीज को डिजिटल रिकॉर्ड में कोई असुविधा न हो।